महाराष्ट्र में महायुति सरकार के गठन को लेकर यह स्थिति काफी दिलचस्प हो गई है। एकनाथ शिंदे के गृह मंत्रालय की मांग पर बीजेपी की असहमति इस सियासी खींचतान का मुख्य कारण बन गई है। शिंदे और बीजेपी के बीच गृह मंत्रालय को लेकर चल रहा यह विवाद सरकार गठन में देरी का कारण बन रहा है। शिंदे के लिए गृह मंत्रालय एक महत्वपूर्ण विभाग है, और वह इसे पाने के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन बीजेपी इसे अपने पास रखने की चाहत रखती है, जैसा कि उनके पिछले शासनकाल में था।
अब, 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण के दिन यह स्पष्ट होगा कि शिंदे को कौन सा विभाग मिलता है और क्या वे सरकार में शामिल होंगे। अगर बीजेपी शिंदे को गृह मंत्रालय नहीं देती, तो यह सवाल उठता है कि वे सरकार में बने रहेंगे या नहीं। यह सियासी मुकाबला महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ पर खड़ा है।
शिंदे सरकार में फडणवीस के पास था गृह मंत्रालय
मुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्रालय सबसे अहम ओहदा है. यूपी-बिहार और अन्य बड़े राज्यों में देखा गया है कि गृह मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री अपने पास रखते हैं. लेकिन, महाराष्ट्र में ऐसा नहीं होता है. शिंदे सरकार के दौरान गृह मंत्रालय विभाग देवेंद्र फडणवीस के पास था. उनसे पहले उद्धव ठाकरे की सरकार में भी मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग नहीं था. उद्धव सरकार में गृह मंत्रालय एनसीपी कोटे में गया था. अनिल देशमुख को होम मिनिस्ट्री सौंपी गई थी और उसके बाद दिलीप वाल्से पाटिल को गृह मंत्री बनाया गया था.















