चीनी हैकर्स AI टूल का कर रहे गलत इस्तेमाल,

माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में एक चेतावनी जारी की है। इसके अनुसार, चीन से जुड़े Storm-0940 हैकर ग्रुप ने ARTEX AI टूल का इस्तेमाल करके दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियों के क्लाउड नेटवर्क में सेंध लगाई है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल ईमेल लिखने या फोटो बनाने तक ही सीमित नहीं रह गया है। एडवांस होने के साथ-साथ इसके खतरे भी बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी अब AI का इस्तेमाल करके जल्दी और पहले की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक साइबर हमले कर रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने एक नई चेतावनी जारी की है। माइक्रोसॉफ्ट की नई चेतावनी के अनुसार, चीन से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियों में सेंध लगाने के लिए AI पावर्ड टूल का इस्तेमाल किया है।AI टूल का किया गलत इस्तेमाल

माइक्रोसॉफ्ट ने स्टॉर्म-0940 (Storm-0940) नाम के एक हैकर ग्रुप का पता लगाया है। इस ग्रुप ने कंपनियों और लोगों पर होने वाले साइबर हमलों को ऑटोमैटिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का इस्तेमाल किया है। टूल की मदद से हैकर्स को तीन घंटे से भी कम समय में कंपनियों के क्लाउड नेटवर्क पर कंट्रोल मिल गया।हैकर्स ने कंपनियों पर सीधा हमला करने के बजाय एक चालाकी भरा रास्ता चुना, जिसे सप्लाई चेन अटैक कहते हैं। इसके तहत उन्होंने सबसे पहले कनेक्टवाइज नाम की एक आईटी कंपनी को निशाना बनाया और खास तौर पर उसकी क्लाउड बैकअप सर्विस में सेंध लगाई।

  • कनेक्टवाइज के CEO मैनी रिवेलो ने बताया कि इस हमले के पीछे चीन से जुड़ा कोई ग्रुप हो सकता है।
  • नुकसान को बढ़ने से रोकने के लिए कनेक्टवाइज ने प्रभावित ऐप्स का कनेक्शन तुरंत रोक दिया और अब धीरे-धीरे अपनी सेवाओं को फिर से शुरू कर रही है।
  • हालांकि, रिवेलो ने चेतावनी दी है कि सिर्फ कनेक्शन रोक देने से हैकर बाहर नहीं होंगे।
  • अगर हैकर्स पहले ही किसी ग्राहक के सिस्टम में घुस चुके हैं, तो वे अंदर ही रहेंगे। इसलिए, सभी ग्राहकों को खुद भी अपने सिस्टम की अलग से जांच करनी होगी ताकि यह पता चल सके कि हैकर अंदर मौजूद हैं या नहीं।

इसके लिए हैकर्स ने ARTEX नाम के एक ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि स्टॉर्म-0940 हैकर ग्रुप नेARTEX AI का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से उन्होंने दो काम ऑटोमैटिक किए। इसमें पहला पासवर्ड स्प्रेइंग के जरिए एक साथ कई अकाउंट्स पर आम पासवर्ड आजमाकर सिस्टम में घुसने की कोशिश करना और दूसरा सिस्टम में पहुंचने के बाद OAuth ऐप्स की यूजर अनुमतियों का गलत इस्तेमाल करके डेटा तक एक्सेस हासिल करना।AI टूल हर मिनट 2,900 साइन-इन प्रयास कर रहा था, जो 2,250 से ज्यादा अलग-अलग कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गए। एक बार एक्सेस मिलने के बाद AI ने अपने आप नेटवर्क को स्कैन किया, पासवर्ड बदलकर स्थायी बैकडोर बनाए, और खुद को टॉप-लेवल एडमिनिस्ट्रेटर के अधिकार दे दिए। माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि AI इतनी तेजी से काम कर रहा था कि इंसानी सुरक्षा टीमें उसका मुकाबला नहीं कर पाईं, जिससे सुरक्षा करने वालों के पास हमले का पता लगाने और उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचा।

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