कानपुर। अरब सागर में शारजाह के पास पनामा के तेल टैंकर ‘एमटी जेम नंबर 2’ पर हुए भीषण ड्रोन व मिसाइल हमले के बाद कानपुर निवासी चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला शनिवार को सकुशल अपने घर लौट आए हैं।घर पहुंचते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। नितिन को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
9 और 10 अक्टूबर को हुए थे बैक-टू-बैक हमले
घर लौटने वाले नितिन शुक्ला को लेने के लिए उनके घर वाले सुबह ही लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच गए थे। अपने श्याम नगर घर पहुंचने पर हमले की आपबीती साझा करते हुए बताया कि 9 अक्टूबर को जहाज पर पहला ड्रोन हमला हुआ था, जिसके बाद जहाज पर लगी आग को बुझा लिया गया था। इसके बाद अगले दिन यानी 10 अक्टूबर की शाम को जहाज पर एक के बाद एक (बैक-टू-बैक) 4 से 5 ड्रोन और मिसाइल अटैक किए गए। हमलों के वक्त वे और उनका क्रू इंजन रूम में ही मौजूद था।
लाइफबोट से 4-5 मील का सफर, कोस्टगार्ड ने किया रेस्क्यू
नितिन ने बताया कि हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। जान बचाने के लिए चालक दल को तुरंत जहाज छोड़ना पड़ा और वे इमरजेंसी लाइफबोट के जरिए समुद्र में उतरे। लाइफबोट के सहारे लगभग 4 से 5 मील दूर जाने के बाद वहां की कोस्टगार्ड ने उन्हें रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें मिलिट्री बेस ले जाया गया और फिर कंपनी अधिकारियों की मदद से होटल में ठहराया गया।
दस्तावेज और सामान सब जलकर खाक
उन्होंने बताया कि जान बचाने की हड़बड़ाहट में सभी नाविकों के बैग, फोन, जरूरी दस्तावेज और पासपोर्ट जहाज पर ही छूट गए, जो आग में पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। समुद्र के पानी से फोन खराब हो जाने के कारण शुरुआत में संपर्क नहीं हो सका, लेकिन बाद में नए फोन और व्यवस्था होने पर घर पर बात कर अपनी कुशलता की जानकारी दी।नितिन के अनुसार, जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बचा लिए गए हैं। अब उनकी प्राथमिकता जले हुए पासपोर्ट और मरीन दस्तावेजों को दोबारा तैयार करवाने की है। नितिन के सुरक्षित घर वापसी पर पूरे परिवार और क्षेत्र में राहत व खुशी का माहौल है।















