खुले नाले में गिरने से युवक की मौत,

अलवर शहर के अरावली विहार थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 38 वर्षीय युवक की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। यह घटना प्रताप ऑडिटोरियम के सामने स्थित नाले में हुई, जहां युवक का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और घटना को लेकर लोगों में आक्रोश और शोक दोनों का माहौल देखने को मिला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान जितेंद्र निवासी सोनावा डूंगरी के रूप में हुई है। बताया गया कि जितेंद्र के घर में लेट-बाथरूम का निर्माण कार्य चल रहा था, जिस कारण घर में शौचालय अस्थायी रूप से उपयोग में नहीं था। इसी कारण वह देर रात शौच के लिए घर से बाहर निकला और प्रताप ऑडिटोरियम के पास पहुंचा। वहां सड़क किनारे स्थित नाला खुला हुआ था और आसपास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं थी। अंधेरा होने के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे खुले नाले में गिर गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार नाले में गिरने के बाद जितेंद्र को संभलने या बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। नाले में गहराई और पानी का बहाव होने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। काफी देर तक जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई। बाद में लोगों की नजर नाले में पड़े शव पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

घटना की जानकारी मिलते ही अरावली विहार थाना प्रभारी रामेश्वर लाल पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल शव को नाले से बाहर निकलवाया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में भिजवाया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

इस हादसे के बाद क्षेत्र के लोगों में नगर प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि प्रताप ऑडिटोरियम के सामने स्थित यह नाला लंबे समय से खुला हुआ है और कई बार इसकी शिकायत की जा चुकी है। बावजूद इसके न तो नाले को ढका गया और न ही सुरक्षा के लिए कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेड लगाए गए। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते नाले को ढक दिया गया होता या प्रकाश व्यवस्था सही होती तो इस तरह की दुखद घटना नहीं होती।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि नगर निकाय की ओर से लापरवाही तो नहीं बरती गई। वहीं मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। जितेंद्र की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यह घटना एक बार फिर खुले नालों और खराब सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, जिससे भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

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