UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर लगने वाले MDR शुल्क को वापस लेने की मांग की है. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सरकार से इस फैसले को तत्काल वापस लेने को कहा है. वहीं, सरकार के सूत्रों का कहना है कि सूत्रों के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने का फिलहाल कोई विचार नहीं है.दरअसल, नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है. यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं, बल्कि संबंधित व्यापारी या कंपनी से लिया जाएगा. 75 हजार रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह कोई चार्ज नहीं रहेगा.
‘सोच समझ कर फैसला’
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यूपीआई पर एमडीआर लगाने का फैसला सोच समझ कर किया गया, केवल 4 प्रतिशत लेन-देन पर एमडीआर लगेगा, इससे आम लोग प्रभावित नहीं होंगे… पांच साल पहले ही तय हो गया था कि डिजिटल इंफ्रा बनने के बाद एमडीआर लगेगा… UPI मर्चेंट चार्ज को लेकर दोबारा विचार नहीं होगा.
राहुल गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ‘इंदिरा जी से एक बार पूछा गया था कि वे बाएं और झुकती हैं या दायीं ओर… इस पर इंदिरा जी ने कहा कि मैं तनकर खड़ी रहती हूं. लेकिन मोदी का पूरा अलग कॉन्सेप्ट है, वे न तो लेफ्ट हैं और न ही राइट, उन्होंने सीधा डोनाल्ड ट्रंप के सामने सीधे लेट जाने फैसला किया है…. मोदी जी ने यूपीआई पर टैक्स लगाकर हरेक भारतीय पर टैक्स लगा दिया है और अमेरिका को भारी पैसा दे दिया है.राहुल गांधी ने मांग की कि मोदी जी कृपया अमेरिका के सामने लेटना बंद करिए, कुछ हिम्मत दिखाइए, खड़े हो जाइए और यूपीआई टैक्स को वापस लीजिए. इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था, ‘मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है… अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है… इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है.’
‘अमेरिका के सामने PM सरेंडर’
राहुल गांधी ने कहा था, ‘सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से… अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं, अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है, अमेरिकी ट्रेड डील की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं.’















