मुजफ्फरनगर। होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा के सभागार में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला “शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान से संवर्धन” का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, नवाचारों तथा विद्यार्थियों के मनोविज्ञान की बेहतर समझ प्रदान करना है, ताकि शिक्षा को अधिक प्रभावी, रोचक और परिणामदायी बनाया जा सके। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. प्रेरणा मित्तल, ट्रेनर रितु कश्यप, डॉ. अनिल कश्यप योगी, अंकित चौधरी, पंकज धीमान, विकास भार्गव, रीटा दहिया तथा प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. प्रेरणा मित्तल ने कहा कि शिक्षा में नवाचार वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शिक्षक नए विचारों, तकनीकों और संसाधनों का उपयोग कर विद्यार्थियों तक ज्ञान को अधिक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ शिक्षण पद्धतियों में व्यापक परिवर्तन आया है और अब केवल पारंपरिक तरीकों से शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक बच्चे की समझने और सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप विविध शैक्षणिक साधनों और तकनीकों का प्रयोग करना चाहिए।
ट्रेनर रितु कश्यप ने डॉ. मारिया मॉन्टेसरी की बालकेंद्रित शिक्षण पद्धति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बच्चों को उनकी रुचि, क्षमता और विकास की गति के अनुसार सीखने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल मार्गदर्शन करना है, जबकि सीखने की प्रक्रिया बच्चों के स्वाभाविक अनुभवों से विकसित होती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कक्षा का वातावरण भयमुक्त और आनंदमय होना चाहिए, ताकि विद्यार्थी सहजता से सीख सकें और शिक्षकों से बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।
व्यापारियों में भय का माहौल न बने, कार्रवाई से पहले नोटिस देना जरूरी : कपिल देव अग्रवाल
डॉ. अनिल कश्यप योगी ने विद्यार्थियों के मनोविज्ञान को समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हर विद्यार्थी की रुचि, व्यक्तित्व और भावनात्मक आवश्यकताएं अलग होती हैं। एक सफल शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों की जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को विकसित करने में सक्षम हो। उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण, सकारात्मक अनुशासन, प्रभावी संचार और भावनात्मक संतुलन को आधुनिक शिक्षा की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं बताया। कार्यशाला के अंत में प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने सभी अतिथियों और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचार नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नवाचार और मनोविज्ञान की समझ शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता पहचानने और उसे सही दिशा देने में मदद करती है।















