बांदा। मोहर्रम की रात को एक सैकड़ा से भी ज्यादा स्थानों पर जनपद बाँदा में आग के अलाव जलाए गए। लोगों ने धधकती आग के अंगारों को हाथ में लेकर इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया। अलाव की लपटों के बीच या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। शहर के मुख्यालय, रामा के इमामबाड़ा, बाबूलाल चौराहा,गूलर नाका, छावनी, कटरा, कर्बला, अलीगंज, ईदगाह रोड, खांईपार,खुटला, पीली कोठी और कई गांवों में यह आयोजन श्रद्धा से संपन्न हुआ। आग पर मातम के बाद रात में विभिन्न इमामबाड़ों से ढाल,और अलम का जुलूस निकला। देर सुबह तक जुलूस अपने अपने ईमाम बाड़ो में जा कर समाप्त हुआ।यह जुलूस 10 मोहर्रम की शाम को सभी इमामबाड़ा के ढाल, अलम, व ताजियों के साथ करबला पहुंचेगा। वहां ताजियों को सुपुर्द ए खाक कर दिया जाएगा।इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम शोक का महीना माना जाता है।
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10 मोहर्रम को करबला के मैदान में यजीद की सेना ने पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन समेत 72 लोगों को शहीद किया था। इसी घटना की याद में मुस्लिम समाज मोहर्रम में मातम करता है। जनपद के सभी इमामबाड़े पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। कई स्थानों से पुलिस के द्वारा ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी की गई।















