चंडीगढ़। सेक्टर-37 स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय पर 1 अप्रैल को हुए ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दोनों मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।इनमें से एक आरोपित ने हैंड ग्रेनेड फेंका था, जबकि दूसरे ने पूरे हमले का वीडियो बनाया था।
जांच में इस साजिश के तार विदेशों, खासकर पुर्तगाल और जर्मनी तक जुड़े पाए गए हैं, जहां से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलर इस मॉड्यूल को संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार मुख्य आरोपितों की पहचान रूपनगर जिले के गांव रत्नगढ़ निवासी अमनप्रीत और गुरतेज के रूप में हुई है।दोनों को पुलिस ने पहले ही हिरासत में ले लिया था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी अब सार्वजनिक की गई है। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि दोनों सीधे तौर पर हमले को अंजाम देने में शामिल थे-एक ने ग्रेनेड फेंका और दूसरे ने इसकी रिकॉर्डिंग कर इसे विदेश बैठे हैंडलरों तक पहुंचाया।
5 आरोपित पहले हो चुके गिरफ्तार
इससे पहले शनिवार को पुलिस ने इस मामले में पांच अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें रविवार को मोहाली में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा रहा है। इनमें नवांशहर के तीन, संगरूर और शिमला के एक-एक आरोपित शामिल हैं। इन सभी ने हमले के लिए हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया था।जांच में सामने आया है कि इस पूरे हमले की साजिश विदेश में बैठे आईएसआई से जुड़े हैंडलरों ने रची थी। खास बात यह है कि इस मॉड्यूल में एक ऐसा युवक भी शामिल था, जो पुर्तगाल से छुट्टियां मनाने के लिए भारत आया हुआ था। नवांशहर के बालाचौर क्षेत्र से जुड़े इस युवक ने स्थानीय नेटवर्क के जरिए विस्फोटक सामग्री की सप्लाई में अहम भूमिका निभाई।
पुर्तगाल से भारत पहुंची विस्फोटक सामग्री
सूत्रों के मुताबिक, भरापुर के पास मजारी क्षेत्र में रहने वाले जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, जो जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों में रह चुका है, ने पुर्तगाल से आए चरणजीत सिंह के माध्यम से विस्फोटक सामग्री भारत भेजी। यह सामग्री मजारी के एक दुकानदार के जरिए आगे पहुंचाई गई, जिसका इस्तेमाल भाजपा कार्यालय पर हमले में किया गया।चरणजीत सिंह (28), जो पुर्तगाल लौटने की तैयारी में था, को 2 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थितियों में सादे कपड़ों में आई टीम ने हिरासत में लिया। उसके परिवार ने इसे अगवा करने का आरोप लगाया, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई थी।
भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो 2022 से पंजाब-चंडीगढ़ क्षेत्र में सक्रिय है। लगातार बदलती रणनीति के तहत स्थानीय युवकों को इस्तेमाल कर विदेशी हैंडलर भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।फिलहाल पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की टीमें पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।















