अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के साथ निजी और व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखते हुए भारत-अमेरिका के रिश्तों की बलि चढ़ा दी। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के रिश्ते वैश्विक राजनीति और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं। पूर्व NSA के मुताबिक, ट्रंप ने दक्षिण एशिया में अमेरिकी नीति को लेकर संतुलन साधने के बजाय पाकिस्तान की ओर झुकाव दिखाया और इसके पीछे उनके कारोबारी संबंध प्रमुख कारण थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति भारत के लिए नुकसानदेह साबित हुई। भारत और अमेरिका के बीच जिस रणनीतिक साझेदारी की नींव बराक ओबामा और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में पड़ी थी, उसे ट्रंप काल में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। खासकर रक्षा और व्यापारिक सहयोग के मोर्चे पर प्रगति धीमी रही। पूर्व NSA का यह भी कहना है कि पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद ट्रंप ने वहां अपने कारोबारी समझौते बनाए रखने की कोशिश की। इसके चलते भारत के साथ कई अहम सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर तालमेल कमजोर पड़ा।
भारत लंबे समय से अमेरिका को एक विश्वसनीय साझेदार मानता रहा है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए। लेकिन ट्रंप के कार्यकाल में पाकिस्तान को दी गई तरजीह ने भारत में असंतोष पैदा किया। पूर्व NSA का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि निजी व्यावसायिक हितों ने वैश्विक कूटनीति को प्रभावित किया। अब सवाल यह है कि क्या मौजूदा अमेरिकी प्रशासन इन रिश्तों को फिर से मजबूत कर पाएगा और भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जा सकेगा।















