रक्षाबंधन पर द स्काइलैण्ड स्कूल की छात्राओं ने राष्ट्रपति भवन में बढ़ाया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मुज़फ्फरनगर, शाहपुर। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुज़फ्फरनगर के द स्काइलैण्ड स्कूल की छात्राओं अंशिका गोयल, अविका गुप्ता, अविका बालियान, वंशिका बालियान और अवनी कुमारी ने विद्यालय प्रबंधक मनोज गोयल के साथ राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में भाग लेकर जनपद का नाम रोशन किया। यह अवसर न केवल भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन का था, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के संकल्प का भी बना।

समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ने देशभर से आए बच्चों को संबोधित किया। अपने प्रेरक भाषण में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हमारे देश में केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधों को भी रक्षाबंधन की आवश्यकता है। उन्होंने सभी बच्चों को संकल्प दिलाया कि वे अपने घर लौटकर पेड़-पौधे लगाएं और उनकी रक्षा करें। राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम पेड़-पौधों की रक्षा करेंगे तो यह संदेश समाज में फैलेगा और अन्य लोग भी प्रेरित होंगे। इससे न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित होगा।

राष्ट्रपति मुरमू ने बच्चों को इस दिशा में जागरूक करते हुए कहा कि रक्षाबंधन का असली अर्थ केवल रिश्तों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें अपनी धरती, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए भी संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए राखी बांधती है, वैसे ही हमें पेड़-पौधों की सुरक्षा के लिए भी “रक्षा सूत्र” का बंधन बनाना चाहिए।

राष्ट्रपति के प्रेरक शब्दों से उत्साहित होकर सभी बच्चों ने समारोह के अंत में राष्ट्रपति को राखी बांधी। इस दौरान द स्काइलैण्ड स्कूल की छात्राओं ने विशेष रूप से हाथ से बनाई हुई एक सुंदर पेंटिंग भी राष्ट्रपति को भेंट की, जिसे देखकर राष्ट्रपति ने उनकी सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

विद्यालय प्रबंधक मनोज गोयल ने कहा कि इस अवसर ने बच्चों को न केवल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तित्व से मिलने का गौरव दिया, बल्कि उन्हें जीवन भर के लिए एक प्रेरणा भी दी। उन्होंने कहा कि द स्काइलैण्ड स्कूल हमेशा छात्रों को सामाजिक और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहता है।

इस अवसर पर उपस्थित सभी लोग इस बात से सहमत नजर आए कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और बच्चों में इस भावना को विकसित करना बेहद जरूरी है। रक्षाबंधन जैसे सांस्कृतिक पर्व के साथ पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश जोड़ना एक अनूठी पहल है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

राष्ट्रपति भवन का यह समारोह न केवल यादगार रहा, बल्कि वहां उपस्थित हर बच्चे के मन में प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का बीज भी बो गया, जो भविष्य में हरियाली और स्वच्छता के रूप में फल-फूल सकेगा।

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