होर्मुज पर अमेरिका-ईरान आमने-सामने… जिस रूट से दुनिया में 20 फीसदी तेल पहुंचता है उसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं. अमेरिका राष्ट्रपति इस रूट पर निकलने वाले जहाजों को रोककर नाकाबंदी करना चाहते हैं.यह कदम उठाकर ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं. उधर ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को धमकी दी. ईरानी सेना ने कहा है कि इस क्षेत्र में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा. ऐसा होता है तो फिर से युद्ध शुरू होने का खतरा है.
भारतीय जहाजों पर कोई रोक नहीं, कोई टैक्स नहीं… ईरान के विदेश मंत्री ने पहले ही साफ किया था कि होर्मुज से गुजरने वाले भारत समेत पाकिस्तान, रूस, चीन और इराक के जहाजों को न तो रोका जाएगा और न ही उनसे किसी तरह का कोई टैक्स लिया जाएगा. भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथली का कहना है, भारत सरकार से हमारे अच्छे सम्बंध हैं. हमारे विदेश मंत्री ने भारत को पांच मित्र देशों में से एक बताया है. (Getty Images)

समंदर में होर्मुज रूट का रास्ता कितना गहरा… स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की गहराई अलग-अलग जगह पर अलग-अलग है. इसकी औसत गहराई लगभग 50 से 60 मीटर है और अधिकतम गहराई 90 से 100 मीटर है. होर्मुज रूट अपनी लोकेशन के कारण बहुत महत्वपूर्ण है. उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से घिरा यह रूट जो अपने प्रवेश और अंतिम बिंदु पर लगभग 50 किमी चौड़ा है. अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 33 किमी चौड़ा है.
शिप के लिए समंदर कितना होना जरूरी… समंदर पर चलने वाले जहाज के लिए एक खास गहराई जरूरी होती है तभी यह पानी पर तैरते हुए आगे बढ़ पाता है. शिप के लिए समुद्र की गहराई इस बात पर निर्भर करती है कि जहाज़ कितना बड़ा है यानी उसका “ड्राफ्ट” कितना है. पानी में जहाज़ का जितना हिस्सा डूबा होता है, वही उसका ड्राफ्ट कहलाता है,इतनी गहराई जरूरी… सुरक्षित सफर तय करने के लिए समुद्र की गहराई जहाज के ड्राफ्ट से ज्यादा होनी चाहिए. इसे उदाहरण से समझ लेते हैं. 2 मीटर ड्राफ्ट वाले जहाज के लिए पानी की गहराई करीब 6 से 8 मीटर होनी चाहिए. वहीं, 8 मीटर ड्राफ्ट वाले कार्गो शिप के लिए समंदर की गहराई 10 से 12 मीटर होनी चाहिए.















