मुजफ्फरनगर के कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत सभागार में डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, अपर जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक सहित कलेक्ट्रेट के अनेक अधिकारी और कर्मचारियों ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम का माहौल गंभीर और प्रेरणादायक रहा, जहां उपस्थित सभी अधिकारियों ने उनके जीवन, विचारों और योगदान को याद करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की धरती पर अनेक महान विभूतियों ने जन्म लिया है, जिन्होंने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्हीं महान पुरुषों में डॉ भीमराव अंबेडकर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्होंने समाज में समानता स्थापित करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों को अपनाकर ही एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षित बनाना ही उनके उज्जवल भविष्य की कुंजी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि समाज में जागरूकता और विकास तभी संभव है, जब हर परिवार शिक्षा को प्राथमिकता देगा।
वहीं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान के माध्यम से समाज के हर वर्ग को अधिकार और समान अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संविधान को जरूर पढ़ें और उसके प्रावधानों को समझें। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के लिए कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और संविधान की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, जिससे वे अपने अधिकारों का सही तरीके से उपयोग कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए और अंबेडकर के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में उतारने और समाज में समानता, न्याय और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक बना, बल्कि समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी देता नजर आया।

















