लगातार स्क्रीन देखने की आदत दिमाग पर डाल रही असर, एक साथ कई काम करना भी बढ़ा रहा मानसिक दबाव: विशेषज्ञ

मुजफ्फरनगर। मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरण आज लोगों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, नौकरी, ऑनलाइन मीटिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के कारण अधिकांश लोग दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बिताते हैं। हालांकि डिजिटल तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम और एक साथ कई काम करने यानी मल्टीटास्किंग की आदत मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, एकाग्रता कम होने लगती है और मानसिक थकान बढ़ जाती है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. के.एम. हसन के अनुसार, अधिकांश लोगों को लगता है कि वे एक साथ कई काम आसानी से कर सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि मानव मस्तिष्क एक समय में केवल एक ही काम पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकता है। जब व्यक्ति बार-बार अपना ध्यान एक काम से दूसरे काम पर बदलता है तो दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे उत्पादकता घटती है और लंबे समय में याददाश्त तथा ध्यान लगाने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को छोटी-छोटी बातें भूलने लगे, हर समय थकान महसूस हो, दिमाग भारी लगे, चिड़चिड़ापन या चिंता बढ़ जाए, काम में मन न लगे या रात में अच्छी नींद न आए, तो यह अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल के संकेत हो सकते हैं। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी प्रभावित होती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और अगले दिन मानसिक व शारीरिक ऊर्जा भी कम महसूस होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों का पूरी तरह त्याग करना संभव नहीं है, लेकिन इनके उपयोग में संतुलन बेहद जरूरी है। इसके लिए एक समय में केवल एक काम करने की आदत डालनी चाहिए, हर 20 मिनट बाद कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर आंखों और दिमाग को आराम देना चाहिए, सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए तथा रोजाना कुछ समय बिना किसी डिजिटल उपकरण के बिताना चाहिए। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और परिवार के साथ समय बिताना भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर स्क्रीन टाइम को नियंत्रित किया जा सकता है और दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्रिय तथा तेज रखा जा सकता है।

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