प्रतापगढ़ – जिले के अरनोद उपखंड क्षेत्र के निनोर गांव में स्थित पद्मावती माता मंदिर में हर साल चैत्र रंग पंचमी के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां श्रद्धालु धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। मान्यता है कि माता के प्रति सच्ची आस्था रखने वाले को अग्नि कुंड पर चलने से कोई आंच नहीं आती और वे निरोग रहते हैं।

मखमली गलीचे की तरह अंगारों पर चलते श्रद्धालु
बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष सभी माता के दर्शन के लिए अंगारों पर इस तरह चलते हैं, जैसे किसी फूलों की चादर पर चल रहे हों। निनोर का पद्मावती माता मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है और यहां विराजमान मां पद्मावती की प्राचीन प्रतिमा विशेष महत्व रखती है।
माता की प्रतिमा धारण करती है तीन रूप
मान्यता है कि यह प्रतिमा दिन में तीन रूप धारण करती है, इसलिए इसे त्रिरूपधारिणी भी कहा जाता है। इस अनूठी मान्यता के चलते मध्यप्रदेश, गुजरात, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे स्थानों से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
3300 साल पुराना इतिहास, नल-दमयंती से जुड़ा निनोर
ऐसा माना जाता है कि निनोर कस्बे का संबंध उत्तर महाभारत काल से है और यह प्रसिद्ध नल-दमयंती कथा से जुड़ा हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, वर्तमान निनोर गांव उस समय नैनावती नामक समृद्ध नगर था।
तीन दिन तक लगता है मेला, पुजारी करते हैं शुरुआत
हर साल चैत्र रंग पंचमी पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, जो पंचमी से सप्तमी तक चलता है। इस दौरान मंदिर प्रांगण में अंगारों की चूल का आयोजन होता है। बुधवार शाम 6 बजे मंदिर पुजारी सबसे पहले धधकते अंगारों पर चलते हैं और मां पद्मावती के दर्शन करते हैं। इसके बाद मेले में आए भक्त भी अग्नि परीक्षा देते हुए माता की प्रतिमा के दर्शन करते हैं।
पद्मावती माता के इस चमत्कारी मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु आकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और अग्नि पर चलने की इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनते हैं।















