मुजफ्फरनगर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आयोजित हुई विशेष कार्यशाला.

मुजफ्फरनगर में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत जिला गंगा समिति और कृषि विभाग के सहयोग से नमामि गंगे योजना के तहत प्राकृतिक खेती विषयक एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन विकास भवन सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने की, जबकि उप कृषि निदेशक के मार्गदर्शन में कार्यशाला संपन्न हुई। इस अवसर पर जनपद के जानसठ, मोरना और पुरकाजी विकास खंडों से नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग तथा नमामि गंगे योजना से जुड़े कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी), प्रगतिशील किसान और बड़ी संख्या में स्थानीय कृषकों ने भाग लिया।

कार्यशाला में प्राकृतिक और जैविक खेती की उपयोगिता, तकनीक तथा उसके पर्यावरणीय लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रभारी अधिकारी डॉ. जे.पी. शर्मा ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निआस्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों को तैयार करने की विधि, उनके उपयोग का सही समय तथा फसलों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी।

गन्ना शोध केंद्र, मुजफ्फरनगर के वैज्ञानिकों ने भी किसानों को उन्नत खेती की तकनीकों से अवगत कराया। डॉ. वेद प्रकाश ने गन्ने की फसल की उत्पादकता बढ़ाने के उपाय बताए, जबकि डॉ. अजय कुमार सिंह ने जैविक कीटनाशकों और जैविक फफूंदीनाशकों जैसे ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और ट्राइको कार्ड के उपयोग पर जानकारी दी। डॉ. जे.पी. सिंह ने प्राकृतिक विधि से गन्ने की खेती करने और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए आवश्यक कृषि प्रबंधन तकनीकों को विस्तार से समझाया। कृषि विज्ञान केंद्र, चितौड़ा की वैज्ञानिक डॉ. पूजा ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से तैयार की गई गन्ना और गेहूं की फसलों के सफल परिणामों को किसानों के सामने प्रस्तुत किया।

मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विषमुक्त खाद्य उत्पादन न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि इससे मृदा, जल और वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र और शॉल देकर सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया गया।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts