मुजफ्फरनगर में मिशन शक्ति 5.0 के द्वितीय चरण के अंतर्गत रिजर्व पुलिस लाइन स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें नाबालिगों से जुड़े मामलों में वैधानिक कार्यवाही और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के प्रभावी अनुपालन पर विस्तार से चर्चा की गई। इस गोष्ठी में थाना एएचटी, एसजेपीयू तथा विभिन्न थानों पर नियुक्त बाल कल्याण अधिकारियों ने भाग लिया और अपने–अपने अनुभव साझा करते हुए मामलों के निष्पादन में आने वाली चुनौतियों पर विचार–विमर्श किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नाबालिग पीड़ितों से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता के साथ–साथ कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिल सके।गोष्ठी के दौरान एपीओ नितिन कुमार ने उपस्थित अधिकारियों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन शक्ति के तहत बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा, उनका सशक्तिकरण और उनमें कानून के प्रति विश्वास पैदा करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रत्येक प्रकरण में त्वरित, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जांच के दौरान सभी कानूनी पहलुओं का ध्यान रखते हुए पीड़ित के अधिकारों की रक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में चूक न हो।इस अवसर पर थाना एएचटी प्रभारी निरीक्षक जयसिंह भाटी ने भी अपने विचार रखे और बताया कि मानव तस्करी तथा बाल अपराध से जुड़े मामलों में सतर्कता और समन्वय बेहद जरूरी है। चिकित्सा विभाग से आए डॉ. मनोज कुमार ने नाबालिग पीड़ितों की मेडिकल जांच से संबंधित प्रक्रियाओं और आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से गौरव मलिक ने पीड़ितों को मिलने वाली कानूनी सहायता और उनके अधिकारों पर प्रकाश डाला, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता गजला यामीन ने समाज की भूमिका और जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।इसके अलावा चाइल्ड लाइन से भुवनेश्वर कुमार तथा वन स्टॉप सेंटर से सुषमा शर्मा, बीना शर्मा और ऋतु चौधरी ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से पीड़ितों को त्वरित सहायता और सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, गोपनीयता और कानूनी प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है।गोष्ठी का समापन इस निष्कर्ष के साथ हुआ कि सभी संबंधित विभाग मिलकर कार्य करें और निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें, ताकि नाबालिग पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और समाज में सुरक्षा एवं विश्वास का माहौल मजबूत हो सके।















