मालाखेड़ा उपखंड के चोमू स्थित संस्कृत विद्यालय में पिछले सात वर्षों से विषय अध्यापकों की भारी कमी बनी हुई है। विद्यालय में कुल 14 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल सात पद ही भरे हुए हैं। इस कमी के कारण विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे अभिभावकों ने अपने बच्चों को अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिलाना शुरू कर दिया है।

स्थानीय लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। विद्यालय को संकुल केंद्र बनाया गया है, जहां एक अध्यापक हमेशा संकुल से जुड़ी सूचनाओं और वेतन संबंधित कार्यों में व्यस्त रहता है। प्रधानाध्यापक भी प्रशासनिक कार्यों में लगे रहते हैं, जिससे केवल पांच शिक्षक ही अध्यापन का कार्य संभाल रहे हैं। इन शिक्षकों को हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जबकि ये उनके विषय नहीं हैं।
विद्यालय में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान के तीन पद रिक्त हैं। इसके अलावा, तृतीय श्रेणी एल-2 और एल-1 के भी एक-एक पद खाली हैं। लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद भी लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।गांव के कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने बताया कि वर्षों से विषय अध्यापक नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन अपने बच्चों का दाखिला अन्य विद्यालयों में कराना पड़ा। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार विधायक और मंत्रियों से भी मुलाकात की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक महेश कर्णावत ने बताया कि विषय अध्यापकों की कमी के चलते सामान्य शिक्षक ही विषय अध्यापक की भूमिका निभा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।















