मुजफ्फरनगर में कृषि विभाग ने कीटनाशी विक्रेताओं के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए IPMS पोर्टल पर पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है। कृषि रक्षा अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने सभी लाइसेंसधारी कीटनाशी विक्रेताओं को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण नहीं कराया गया, तो उनके लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए जाएंगे। यह निर्देश अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा), उत्तर प्रदेश, लखनऊ की अध्यक्षता में आयोजित एक ऑनलाइन बैठक के दौरान दिए गए, जिसमें प्रदेश भर के संबंधित अधिकारियों को इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश मिले।राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि IPMS पोर्टल, जिसका पूरा नाम एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली है, पर पंजीकरण करना सभी विक्रेताओं के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से कीटनाशी रसायनों की बिक्री, भंडारण और वितरण से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पहले भी कई बार विक्रेताओं को इस संबंध में सूचित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक जनपद में केवल 50 लाइसेंसधारी विक्रेताओं ने ही पंजीकरण कराया है, जो कि अत्यंत कम संख्या है।उन्होंने पंजीकरण की प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि विक्रेता ipms.gov.in वेबसाइट पर जाकर होम पेज पर दिए गए “register” विकल्प पर क्लिक करें और उसके बाद “sign up” करके अपनी फर्म से संबंधित सभी आवश्यक विवरण भरें। इसके बाद एक नई आईडी तैयार होगी, जिसे विभाग द्वारा सत्यापन के बाद स्वीकृत किया जाएगा। यह प्रक्रिया सरल और ऑनलाइन है,
इसलिए सभी विक्रेताओं को इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।कृषि रक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 5 अप्रैल 2026 तक जिन विक्रेताओं द्वारा IPMS पोर्टल पर पंजीकरण नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके कीटनाशी लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपनी जिम्मेदारी को समझें और पंजीकरण की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जा सके।इस निर्देश के बाद जनपद के कीटनाशी विक्रेताओं में हलचल तेज हो गई है और कई विक्रेता अब तेजी से पंजीकरण कराने में जुट गए हैं। विभाग का उद्देश्य इस प्रणाली के माध्यम से कीटनाशी दवाओं के उपयोग को नियंत्रित करना और किसानों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना है। साथ ही यह पहल कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।















