ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने भारत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में भारतीय लोग विश्वसनीय और दयालु साझेदार साबित हुए हैं।राजदूत ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार को भी सभी जरूरी व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य भारतीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना द्वारा फारस की खाड़ी में लगाए जा रहे नाकेबंदी के आर्थिक परिणामों की चेतावनी भी दी।
अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने का क्या वजह
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने के बाद पहली बार बोलते हुए फतहाली ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत को पांच मित्र देशों में शामिल किया है। दोनों सरकारों के बीच सीधा संपर्क चल रहा है ताकि भारतीय जहाज बिना किसी बाधा के जलडमरूमध्य से गुजर सकें।राजदूत ने कहा कि अमेरिका वार्ता में बातचीत करने नहीं, बल्कि ईरान से समर्पण की मांग करने आया था। हमारी टीम ने कहा कि अगर आप अपनी गैर-कानूनी मांगें छोड़ दें और हमारे अधिकारों व हितों को मानें तो बातचीत आगे बढ़ सकती है। दुर्भाग्य से अमेरिका ने समर्पण की मांग की।फतहाली ने 2018 में अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से बाहर निकलने का जिक्र करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान की क्षमता और उसके लोगों के संकल्प को लेकर गलत आंकलन किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हॉर्मुज को बंद करने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंड नष्ट हो जाएंगे। जल्द ही तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी।राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है, लेकिन अपने रक्षकों के संघर्ष को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने मित्र देशों जैसे भारत के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।
ईरानी राजदूत ने भारत के लिए क्या कहा?
एएनआई से बात करते हुए डॉ. मोहम्मद फतहाली ने दिल्ली में कहा कि मैं सभी भारतीय लोगों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। मेरा विश्वास है कि उन्होंने कठिन समय में सच्चे रूप से विश्वसनीय और दयालु साझेदार होने का प्रदर्शन किया है। मैं भारत सरकार को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसने इस मुश्किल समय में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने में सहयोग किया।राजदूत ने भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच साझा हित हैं और भारत एक विश्वसनीय मित्र है।
अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का रुख
समुद्री नाकेबंदी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर बोलते हुए डॉ. फतहाली ने कहा कि हमारे लिए कूटनीति हमारे ईरानी रक्षकों के संघर्ष का ही एक विस्तार है। हम अमेरिका द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन और उसके दुष्ट इरादों को नहीं भूले हैं और कभी नहीं भूलेंगे। हमारे पास अमेरिका के साथ कई अनुभव हैं।उन्होंने युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि आपने सुना और देखा होगा कि ईरान बातचीत की प्रक्रिया में था, लेकिन जियोनिस्ट शासन और अमेरिका ने हमला शुरू कर दिया।
अमेरिका का आया रिएक्शन
अमेरिकी सेना ने कहा है कि ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में अरब सागर में नाकेबंदी लागू की जाएगी।रॉयटर्स के अनुसार, नाविकों को भेजे गए नोट का हवाला देते हुए सेना ने कहा कि इस नाकेबंदी से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते, ईरान के अलावा अन्य जगहों से आने-जाने वाले जहाजों के आवागमन में कोई रुकावट नहीं आएगी।अमेरिकी सेना ने कहा कि यह नाकेबंदी सभी तरह के जहाजों पर लागू होगी, चाहे वे किसी भी देश के झंडे तले चल रहे हों। नाविकों को भेजे गए नोट में कहा गया है कि कोई भी जहाज, जो बिना अनुमति के इस नाकेबंदी वाले इलाके में प्रवेश करेगा या वहां से बाहर निकलेगा, उसे “रोका जा सकता है, उसका रास्ता बदला जा सकता है, या उसे कब्जे में लिया जा सकता है।















