राजगढ़ (अलवर)। कस्बे के राजगढ़–टहला सड़क मार्ग पर स्थित बडला ग्राम के समीप उस समय कौतूहल और उत्सुकता का माहौल बन गया, जब ग्रामीणों को एक दुर्लभ पक्षी लक्ष्मी वाहन उल्लू हल्की घायल अवस्था में दिखाई दिया। यह उल्लू एक घर के पास लगे पेड़ के नीचे बैठा हुआ था और उड़ पाने में असमर्थ नजर आ रहा था। आमतौर पर घने जंगलों में रहने वाला यह पक्षी आबादी क्षेत्र में बहुत कम ही दिखाई देता है, ऐसे में ग्रामीणों ने इसे देख तुरंत इसकी सूचना नगर पालिका और वन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही नगर पालिका कर्मचारी जूगनू तंबोली वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने सावधानीपूर्वक स्थिति का जायजा लिया और बिना किसी नुकसान के घायल उल्लू को रेस्क्यू किया। ग्रामीणों की भीड़ के बीच वन विभाग की टीम ने लोगों को समझाया कि यह पक्षी दुर्लभ होने के साथ-साथ संरक्षित भी है, इसलिए इसे किसी प्रकार की छेड़छाड़ से बचाना जरूरी है। रेस्क्यू के दौरान पक्षी को सुरक्षित कपड़े में ढककर राजगढ़ के पशु चिकित्सालय ले जाया गया।
पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों ने उल्लू की प्राथमिक जांच की। जांच में सामने आया कि उल्लू को मामूली चोटें आई थीं, जो संभवतः उड़ान के दौरान किसी बाधा से टकराने के कारण लगी हों। उपचार के बाद उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर रेस्क्यू और उपचार न मिलता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था। कुछ देर निगरानी में रखने के बाद जब उल्लू पूरी तरह सतर्क और उड़ने योग्य पाया गया, तो उसे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद वन विभाग की टीम और नगर पालिका कर्मचारियों की मौजूदगी में उल्लू को राजगढ़–माचाड़ी सड़क मार्ग पर स्थित लवकुश वाटिका के जंगल क्षेत्र में सुरक्षित रूप से स्वतंत्र कर दिया गया। जैसे ही उसे छोड़ा गया, उल्लू ने कुछ क्षण आसपास का वातावरण देखा और फिर उड़ान भरकर जंगल की ओर चला गया। इस दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और वन विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की।
वन विभाग के अनुसार लक्ष्मी वाहन उल्लू एक दुर्लभ प्रजाति है, जो अधिकतर घने और शांत जंगलों में रहना पसंद करती है। यह पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित करता है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि यदि भविष्य में इस तरह का कोई भी वन्यजीव घायल या संकट में दिखाई दे, तो उसे स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि आमजन की जागरूकता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से वन्यजीवों की रक्षा संभव है। ग्रामीणों की सतर्कता, नगर पालिका और वन विभाग के समन्वय से एक दुर्लभ पक्षी को नया जीवन मिल सका, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।















