मुजफ्फरनगर। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही गंभीर बीमारियों में ओवेरियन कैंसर अब एक बड़ी चिंता बनकर सामने आ रहा है। भारतीय महिलाओं में यह कैंसर सबसे आम कैंसरों में तीसरे स्थान पर माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं, जिसके कारण महिलाएं इसे अक्सर गैस, पेट दर्द, हार्मोनल बदलाव या सामान्य शारीरिक परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही लापरवाही बाद में बीमारी को गंभीर अवस्था तक पहुंचा देती है। विशेषज्ञों के अनुसार ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट थ्रेट” कहा जाता है, क्योंकि इसकी शुरुआत बिना किसी स्पष्ट संकेत के होती है और मरीज को लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं मिल पाती।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. प्रेक्षी चौधरी ने बताया कि लगातार पेट फूलना, पेल्विक क्षेत्र या पेट के निचले हिस्से में दर्द, थोड़ा खाने पर पेट भर जाना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन घटना या बढ़ना जैसे लक्षण ओवेरियन कैंसर के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर महिलाएं इन संकेतों को सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझ लेती हैं, जिससे जांच और उपचार में देरी हो जाती है। डॉ. चौधरी के अनुसार यह बीमारी विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक देखी जाती है। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा हो, उनमें इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा मोटापा, बांझपन, कभी गर्भधारण न होना, हार्मोनल असंतुलन और BRCA जैसे जेनेटिक म्यूटेशन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ओवेरियन कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है। अब उपचार केवल सर्जरी और सामान्य कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टार्गेटेड थेरेपी और प्रिसिशन मेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों ने मरीजों को नई उम्मीद दी है। डिबल्किंग या साइटो-रिडक्टिव सर्जरी के जरिए शरीर से अधिकतम ट्यूमर हटाने की कोशिश की जाती है, जिसके बाद प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दी जाती है। BRCA म्यूटेशन वाले मरीजों में PARP inhibitors जैसी नई दवाएं बेहतर परिणाम दे रही हैं। वहीं एडवांस स्टेज के मरीजों में HIPEC तकनीक जीवन की गुणवत्ता और सर्वाइवल दोनों को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो रही है। विशेषज्ञों ने महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को भी गंभीरता से लेने की अपील की है।























































