पाकिस्तान में छिपकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकियों के लिए अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। हाल ही में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े तीन बड़े आतंकियों की रहस्यमयी हालात में मौत हो गई।इन लगातार हो रही मौतों ने पाकिस्तान में एक्टिव आतंकी नेटवर्क और सुरक्षा एजेंसियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के मुताबिक, मरने वालों की पहचान गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर के रूप में हुई है। हालांकि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन तीनों के जनाजे की तस्वीरें सामने आने के बाद इन मौतों की पुष्टि मानी जा रही है।
हाफिज सईद का करीबी कमांडर गाजी मुमताज भी मारा गया
इन तीन मौतों में सबसे ज्यादा चर्चा गाजी मुमताज की हो रही है। बताया जाता है कि वह लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेहद करीबी माना जाता था। गाजी मुमताज खैबर पख्तूनख्वा के अपर दीर जिले का रहने वाला था। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, वह कश्मीर में घुसपैठ की साजिशें तैयार करने और आतंकियों को निर्देश देने में अहम भूमिका निभाता था। उसकी अंतिम नमाज एक प्राथमिक स्कूल में कड़ी सुरक्षा के बीच कराई गई, जिससे उसकी मौत की खबर और मजबूत हो गई।
बहावलपुर में संदिग्ध हादसा, दूसरे आतंकी की भी मौत
लश्कर को दूसरा बड़ा झटका मोहम्मद खुजैमा कासिम की मौत से लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में एक संदिग्ध सड़क हादसे में उसकी जान चली गई। कासिम, लश्कर के वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद याकूब का सगा भाई था। कई सुरक्षा विशेषज्ञ इस घटना को सामान्य सड़क दुर्घटना मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि इस मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है।
खालिद बशीर की मौत से लश्कर का नेटवर्क कमजोर
तीसरा नाम खालिद बशीर का है, जो लश्कर-ए-तैयबा के प्रशासनिक और फाइनेंस नेटवर्क का अहम हिस्सा था। वह संगठन के लिए टेरर फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और नए आतंकियों की भर्ती का काम संभालता था। उसकी मौत की खबर के बाद संगठन के अंदर भी हलचल मच गई है। हालांकि उसकी मौत कैसे हुई, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
लगातार मौतों से लश्कर की कमर टूटी
एक के बाद एक तीन बड़े चेहरों की मौत ने लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में भारत विरोधी कई वांछित आतंकियों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में आपसी गुटबाजी, तो कुछ में अज्ञात हमलावरों का शक जताया गया है। इससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर पड़ सकता है असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन अनुभवी आतंकियों के खत्म होने से लश्कर-ए-तैयबा की कश्मीर में घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों की योजनाओं को बड़ा झटका लगा है। नए आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग और ऑपरेशन चलाने वाले प्रमुख चेहरे अब नहीं रहे। यही वजह है कि संगठन के अंदर डर और असमंजस का माहौल है।
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पाकिस्तान में आतंकियों के लिए बढ़ी मुश्किलें
सबसे बड़ी बात यह है कि अब ये घटनाएं सिर्फ पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं हैं। पंजाब जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी आतंकी रहस्यमयी तरीके से मारे जा रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि पाकिस्तान अब पहले जैसी सुरक्षित पनाहगाह नहीं रह गया है। आने वाले समय में इन घटनाओं का असर लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों और पूरे आतंकी नेटवर्क पर देखने को मिल सकता है।















