मुजफ्फरनगर जेल में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों को अधिकारों की दी गई जानकारी.

मुजफ्फरनगर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला कारागार का निरीक्षण और विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। सिविल जज (सीडी) एवं प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी ने जेल की पाकशाला, अस्पताल, पुरुष बैरक, महिला बैरक और बाल बैरक का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने दोषसिद्ध बंदियों के साथ संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शिविर में बंदियों को उनके संवैधानिक और विधिक अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी गई तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।

निरीक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि यदि किसी बंदी को उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने में किसी प्रकार की कानूनी समस्या आती है, तो वह जेल अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत करा सकता है या आवेदन प्रस्तुत कर सकता है, जिस पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, जिन बंदियों के मामले ई-जेल लोक अदालत या जेल लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित हो सकते हैं, उनकी सूची तैयार कर प्राधिकरण को भेजने के निर्देश जेल अधीक्षक को दिए गए, ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। जिन बंदियों की जमानत याचिकाएं अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित या स्वीकृत हो चुकी हैं, उन्हें भी विधिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई।इस अवसर पर आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी भी दी गई, जिसका आयोजन 9 मई 2026 को किया जाएगा। यह लोक अदालत दीवानी न्यायालय परिसर मुजफ्फरनगर, बाह्य न्यायालय बुढाना, ग्राम न्यायालय जानसठ, ग्राम न्यायालय खतौली और कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित होगी। लोक अदालत के माध्यम से आपराधिक मामलों, एनआई एक्ट की धारा 138 से जुड़े प्रकरण, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, बिजली-पानी और टेलीफोन बिल विवाद, वैवाहिक मामले, भूमि अधिग्रहण, राजस्व और सिविल वादों का निस्तारण किया जाएगा। प्राधिकरण ने अधिक से अधिक लोगों से लोक अदालत में भाग लेकर अपने मामलों का शीघ्र और सुलभ समाधान कराने की अपील की है।

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