मुजफ्फरनगर में मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमलकिशोर देशभूषण की अध्यक्षता में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य जिले में उपलब्ध प्राचीन पाण्डुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका लक्ष्य देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को संरक्षित कर उसे आम जन, शोधार्थियों और विद्यार्थियों तक सुलभ बनाना है। इस अभियान के तहत देशभर में फैली प्राचीन पाण्डुलिपियों को खोजकर उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जा रहा है।
बैठक के संचालन के दौरान डॉ. रणवीर सिंह ने जानकारी दी कि इस मिशन के अंतर्गत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी और सार्वजनिक पुस्तकालयों के साथ-साथ व्यक्तिगत संग्रहों में रखी पाण्डुलिपियों की पहचान और सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद उनकी कैटालॉगिंग, संरक्षण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्य न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार श्रीदास ने कहा कि प्राचीन पाण्डुलिपियां और दुर्लभ अभिलेख हमारी सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। इनका संरक्षण और सुरक्षित हस्तांतरण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और संस्थानों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की।बैठक में जिला स्तरीय समिति के सदस्य और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पुस्तकालयाध्यक्ष, संग्रहालय प्रभारी, शिक्षाविदों और अन्य विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा करते हुए अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया। सभी सदस्यों ने इस पहल को जन-जन तक पहुंचाने और अधिक से अधिक पाण्डुलिपियों को सूचीबद्ध करने का संकल्प लिया, ताकि मुजफ्फरनगर भी इस राष्ट्रीय अभियान में अग्रणी भूमिका निभा सके।















