मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक), पीजेंट वेल्फेयर एसोसिएशन और एपीडा (APEDA) ने बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (BEDF) के साथ मिलकर बासमती चावल की विलुप्त हो रही किस्मों की पहचान को पुनर्स्थापित करने और निर्यात को बढ़ावा देने की संयुक्त योजना बनाई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बासमती की गुणवत्ता सुनिश्चित कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी मांग को बढ़ाना है।संस्थाएं किसानों को कलस्टर निर्माण के लिए प्रेरित करेंगी और किसानों को बाजार मूल्य से 10% अधिक कीमत दिलाने के लिए निर्यातकों के साथ अनुबंध कराएंगी। इस संबंध में धर्मेंद्र मलिक, अशोक बालियान और कृषि सलाहकार अश्विन चौधरी ने BEDF के सहायक निदेशक रितेश शर्मा से मेरठ में बैठक कर विस्तृत योजना तैयार की।बासमती निर्यात प्रोत्साहन मेरठ की प्रमुख गतिविधियों में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग द्वारा किस्मों की पहचान, कीटनाशक अवशेषों का परीक्षण, उन्नत बीज वितरण, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं, जीआई टैग प्रमाणीकरण और ट्रेसिबिलिटी प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा जैविक बासमती को बढ़ावा देने और नई किस्मों के लिए अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी जाएगी।यह प्रयास बासमती की वैश्विक प्रतिष्ठा को बनाए रखने, किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।















