मुजफ्फरनगर। कृषि विभाग उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुमोदित तथा आईआईटी रुड़की के मार्गदर्शन में ट्रांयभू टेक सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड (TRST01) द्वारा संचालित “किसान समृद्धि कार्बन क्रेडिट योजना” के अंतर्गत उप कृषि निदेशक कार्यालय परिसर में किसानों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को कार्बन क्रेडिट योजना की जानकारी देना तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय के नए अवसरों से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में जिले के लगभग 90 किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्बन क्रेडिट योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के माध्यम से वृक्षारोपण, जैविक खेती, सौर ऊर्जा उपयोग तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान यदि पर्यावरण अनुकूल खेती और तकनीकों को अपनाते हैं तो उन्हें निर्धारित मानकों के आधार पर “कार्बन क्रेडिट” प्रदान किए जाएंगे। इन क्रेडिट्स का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापार किया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि संभव होगी।
आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर ए.एस. मौर्या ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना, हरित आवरण को बढ़ावा देना, किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना तथा नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को कम करने के लिए इस प्रकार की योजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं। योजना के तहत किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण शिविर और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक एवं पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि यह योजना “हरित भारत” के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास का एक नया मॉडल विकसित होगा। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के अध्यक्ष डॉ. हंसराज, जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया, डॉ. आलोक पांडेय सीईओ कम्पलाइंस कार्ट नोएडा, डॉ. एकता मिश्रा प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आशीष जायसवाल, संजय कोमेरा, मितु, सचिन कुमार, रवि पुंडीर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।















