मुजफ्फरनगर। जिले में चलाए जा रहे खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत विकसित कृषि संकल्प अभियान के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, पशुपालन तथा मृदा संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अभियान के तहत विकास खंड बघरा की ग्राम पंचायत ढिंढावली, बुढाना खुर्द, नसीरपुर और पीपलहेड़ा तथा विकास खंड बुढाना की ग्राम पंचायत कुरालसी और परासौली में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में कृषि विभाग के कर्मचारियों और कृषि विज्ञान केंद्र, बघरा के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती की लागत कम करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। कृषि विज्ञान केंद्र, बघरा के वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने किसानों को बताया कि पशुपालन केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। उन्होंने पशुओं में होने वाली थनेला बीमारी, उसके बचाव और समय पर टीकाकरण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को पशुपालन और कृषि को एकीकृत रूप से अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसानों की आय भी बढ़ सकती है।
कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी रविंद्र कुमार ने किसानों को उन्नत खेती की तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाना चाहिए, ताकि भूमि की उर्वरता बनी रहे और अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। इसके साथ ही बीज शोधन, समय पर बुवाई, हरी खाद के प्रयोग, जैव उर्वरकों के उपयोग, मृदा प्रबंधन तथा जल प्रबंधन की उपयोगी जानकारी भी किसानों को दी गई। किसानों को विभिन्न फसलों की वैज्ञानिक खेती और रोग-कीट प्रबंधन के उपायों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।
अभियान के दौरान मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक अनाज उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने जैविक उत्पादों के महत्व और उनके स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। साथ ही किसानों को फार्मर रजिस्ट्री, फसल बीमा योजना तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में किसानों की समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आधुनिक एवं टिकाऊ खेती अपनाने का संदेश दिया गया।























































