मुजफ्फरनगर। जिले में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला बाल संरक्षण अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन और महिला हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने ग्राम मुस्सापुर क्षेत्र में औचक अभियान चलाया। अभियान के दौरान चौकी बीबीपुर के पास सड़क किनारे एक महिला अपने तीन छोटे बच्चों के साथ असहाय अवस्था में बैठी मिली। पूछताछ में महिला ने अपना नाम अफसाना पत्नी आकिल बताया। उसके साथ पांच वर्षीय इनाया, तीन वर्षीय सनाया और एक वर्षीय हीबा भी थीं। महिला ने टीम को बताया कि पारिवारिक विवाद के बाद उसके जेठ और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों ने उसके साथ मारपीट की और घर से बाहर निकाल दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल डायल-112 पुलिस को मौके पर बुलाया और महिला को साथ लेकर उसके ससुराल पहुंची। वहां दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद पता चला कि परिवार में जेठानी, देवरानी और ननद के बीच लंबे समय से आपसी विवाद चल रहा था, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई। अधिकारियों ने सभी पक्षों को समझाते हुए घरेलू विवादों को बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाने की सलाह दी तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। समझाइश के बाद परिवार के लोगों ने अफसाना को अपने साथ रखने पर सहमति जताई, जिसके बाद महिला का परिवार में पुनर्वास कराया गया।इसी अभियान के दौरान टीम को चौकी बीबीपुर के पास एक हलवाई की दुकान पर लगभग 13 वर्षीय नाबालिग बालक बर्तन धोते हुए मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम मन्नू उर्फ अमन पुत्र इसराम निवासी ग्राम मुस्सापुर बताया। बाल श्रम कराए जाने की पुष्टि होने पर टीम ने तत्काल बच्चे को वहां से मुक्त कराया और उसके परिजनों को मौके पर बुलाकर बाल श्रम न कराने की सख्त हिदायत दी।
इसके बाद बाल कल्याण समिति के माध्यम से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम, महिला उत्पीड़न और बच्चों के संरक्षण से जुड़े मामलों में जिला प्रशासन पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है। जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे औचक अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे, ताकि कोई भी बच्चा बाल श्रम का शिकार न हो और किसी भी महिला को असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन न बिताना पड़े।























































