महाराष्ट्र : लाडली बहना योजना से चुनाव में महायुति को कितना फायदा

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजर महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव पर होगी. आने वाले समय में इन दोनों राज्यों में राजनीतिक घटनाएं तेज होने की संभावना है. राज्य की जनता भी आगामी विधानसभा चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रही है. महाराष्ट्र में इस वक्त 6 बड़ी पार्टियां बन चुकी हैं. दो प्रमुख क्षेत्रीय दलों शिव सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच विभाजन के बाद यह महाराष्ट्र का पहला विधानसभा चुनाव होगा. इसलिए इस चुनाव पर पूरे देश की नजर है.आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में टाइम्स नाउ नवभारत का ओपिनियन पोल सामने आया है. ओपिनियन पोल के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में महायुति और मावियत के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी. महायुति को 137 से 152 सीटें मिलने की संभावना है. जबकि महाविकास अघाड़ी को 129 से 144 सीटें मिलने का अनुमान है. इस ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी राज्य में नंबर वन पार्टी बनने जा रही है हालांकि पिछले चुनाव के मुकाबले बीजेपी की सीटें घटने वाली हैं.

किसे कितनी मिल सकती है सीट?

ओपिनियन पोल के मुताबिक राज्य में बीजेपी को अधिकतम 83 से 93 सीटें मिल सकती हैं. शिव सेना शिंदे गुट को 42 से 52 सीटें मिल सकती हैं. इसी तरह एनसीपी अजित पवार गुट को 7 से 12 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है. दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस को अधिकतम 58 से 68 सीटें मिलने की संभावना है. इसके बाद एनसीपी शरद पवार गुट को 35 से 45 सीटें मिलने की संभावना है जबकि शिवसेना ठाकरे गुट को 26 से 31 सीटें मिलने की संभावना है. अन्य दलों को 3 से 8 सीटें मिलने का अनुमान है.

सीएम पद के लिए पसंदीदा चेहरा कौन?

यह भी एक अहम सवाल है. जनता की नजरों में मुख्यमंत्री पद के लिए पसंदीदा चेहरा कौन है? इस संबंध में भी एक सर्वे कराया गया है. पोल के मुताबिक राज्य की 37 फीसदी जनता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चेहरे को पसंद करती है. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और देवेन्द्र फडणवीस का चेहरा 21-21 फीसदी लोगों की पसंद है. शरद पवार को 10 फीसदी और अन्य को 11 फीसदी वोट मिले.

लाडली बहना योजना से कितना फायदा?

विधानसभा चुनाव में लाडली बहन योजना से क्या महायुति को लाभ मिलेगा? इस संबंध में भी सर्वे कराया गया. 58 फीसदी लोगों की राय में यह योजना बहुत अच्छी है. 24 फीसदी लोगों का कहना है यह योजना कुछ हद तक ठीक है. 6 फीसदी लोगों का कहना है इस योजना से महायुति को चुनाव में कोई मदद नहीं मिलेगी. 5 फीसदी नागरिकों ने जवाब दिया कि कह नहीं सकते. जबकि 7 फीसदी लोगों का कहा है कि यह योजना केवल प्रचार का एक नया तरीका है.

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