भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1,50,590 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18% अधिक है। यह उपलब्धि न केवल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देती है, बल्कि देश को रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा निर्माण में लगातार वृद्धि दर्ज की है। निजी क्षेत्र और सरकारी रक्षा उत्पादन इकाइयों के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हुआ है। घरेलू स्तर पर हथियार, गोला-बारूद, मिसाइल सिस्टम, विमान, युद्धपोत, रडार सिस्टम और विभिन्न रक्षा तकनीक का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। इससे न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि भारत रक्षा उपकरणों का एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी बन रहा है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार का अगला लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 तक वार्षिक रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाना है। इसके लिए कई नई नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जा रही हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और तकनीकी सहयोग के नए समझौते करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, भारत में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस उपलब्धि के पीछे रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना, स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देना और रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना शामिल है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित हो रहे रक्षा औद्योगिक गलियारों से आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। बीते वर्ष भारत ने मिसाइल, हेलीकॉप्टर, रडार सिस्टम और आर्मर्ड व्हीकल जैसे उपकरण कई देशों को निर्यात किए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित हुई, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की एक भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में पहचान भी मजबूत हुई।
राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरी तरह से स्वदेशी उत्पादन से पूरा करेगा, बल्कि दुनिया के रक्षा बाजार में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की तकनीकी क्षमता, औद्योगिक मजबूती और रणनीतिक संकल्प का प्रमाण है।














