मुंबई में भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार ने हीटवेव से निपटने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी कर दी है. इस SOP के तहत आउटडोर काम करने वाले श्रमिकों के काम के घंटों में बड़ा बदलाव किया गया है.अब दोपहर के सबसे गर्म समय में काम पूरी तरह बंद रहेगा, जबकि सुबह जल्दी और शाम को काम करने की व्यवस्था की गई है.सरकार के नए निर्देशों में अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक, छाया की व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. यह कदम उन श्रमिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है जो सीधे धूप में काम करते हैं.
काम के समय में बड़ा बदलाव
नई गाइडलाइन के अनुसार, श्रमिकों के लिए काम का समय सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक तय किया गया है. दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक के बीच काम पूरी तरह बंद रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. यह समय दिन का सबसे गर्म हिस्सा माना जाता है, जब हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
हाइड्रेशन और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
SOP में सभी कार्यस्थलों पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है. इसके अलावा ORS और इलेक्ट्रोलाइट्स उपलब्ध कराने, नियमित हाइड्रेशन ब्रेक देने और श्रमिकों को छाया में आराम करने की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे श्रमिकों के लिए कूलिंग जोन और अस्थायी शेड तैयार करें, ताकि तेज धूप से राहत मिल सके.
किन सेक्टरों पर लागू होंगे नए नियम?
यह नियम उन सभी सेक्टरों पर लागू होंगे जहां श्रमिक सीधे धूप में काम करते हैं. इनमें कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, सफाई सेवाएं, ट्रैफिक प्रबंधन और स्ट्रीट वेंडिंग शामिल हैं.
महिलाओं और संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष प्रावधान
नई SOP में महिला श्रमिकों और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है. सुबह और शाम की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
स्वास्थ्य सेवाओं को रखा गया अलर्ट पर
हीटवेव के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. हीट स्ट्रोक के इलाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और एंबुलेंस सेवाओं को भी मजबूत किया गया है.
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
राज्य में कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे हीटवेव का खतरा बढ़ गया है. बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने यह SOP लागू की है, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.
दीर्घकालिक योजना पर भी काम
सरकार शहरी क्षेत्रों को ‘हीट-रेजिलिएंट’ बनाने के लिए भी काम कर रही है. इसके तहत कूल रूफ, हरित क्षेत्र बढ़ाने और शहरी ढांचे में सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. मुंबई में लागू किया गया यह नया टाइम-टेबल बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है. इससे न केवल श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में कामकाज के ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.














