वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच अब तक सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। शनिवार को दो नई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें विधेयक पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान समेत कई राजनीतिक नेताओं और संगठनों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन बताया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह विधेयक समानता के अधिकार का हनन करता है और धर्म के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देता है। वहीं, जहां एक ओर विधेयक का विरोध हो रहा है, वहीं कुछ संगठनों ने इसका समर्थन भी जताया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, जहां जल्द सुनवाई की उम्मीद की जा रही है।
वक्फ बिल के विरोध में अब तक 4 याचिकाएं दायर
वक्फ बिल पास होने के बाद विपक्ष और कई मुस्लिम संगठनों ने इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. शनिवार को दिल्ली से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान और एसोसिएशन फॉर द प्रोटैक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने याचिका दायर की है. इसके पहले शुक्रवार को भी 2 याचिकाएं दायर की गई थी. जिसमें कांग्रेस नेता मोहम्मद जावेद और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यह याचिका लगाई थी.
कांग्रेस नेता जावेद ने अपनी याचिका में दावा किया गया कि इन प्रतिबंधों से उन लोगों के खिलाफ भेदभाव होगा, जिन्होंने कुछ समय पहले इस्लाम धर्म अपनाया है और अपनी संपत्ति धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित करना चाहते हों. लिहाजा इससे संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन होता है. इसलिए उन्होंने मांग की है कि इस विधेयक पर रोक लगाई जाए.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल के विरोध में याचिका दायर की है. याचिका में उन्होंने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक के प्रावधान मुसलमानों और मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में चर्चा के दौरान संशोधन के विरोध में विधेयक की कॉपी को फाड़ दिया था.
एसोसिएशन फॉर द प्रोटैक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने भी वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. अब तक बिल को भले ही राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इसके विरोध में 4 याचिकाएं दायर हो चुकी हैं.















