बेटी सहर शेख के खिलाफ FIR के आदेश पर पिता ने संभाला मोर्चा

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में ठाणे के मुंब्रा से जीतकर पार्षद बनी सहर शेख ने जितेंद्र आव्हाड का मजाक उड़ाकर सुर्खियां बटोरीं थीं। अगले पांच साल में मुंब्रा को हरे रंग में रंगने के बयान पर विवाद भी हुआ था, लेकिन ठाणे जिला प्रशासन से ओबीसी का जाति प्रमाणपत्र हासिल करने के मामले में उनकी मुश्किलें बढ़ गई है।

ठाणे तहसीलदार कार्यालय ने मुंब्रा से एआईएमआईएम पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने और उसके आधार पर अपनी बेटी के लिए जाति (ओबीसी) प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी।

आईपीएल मैच में नजर आईं सहर शेख


बेटी के जाति प्रमाणपत्र पर सवाल खड़े होने के बाद अब पिता यूनुस शेख ने बड़ा बयान दिया है। शेख ने कहा है कि इस पूरे विवाद के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जिम्मेदार हैं।एआईएमआईएम नेता यूनुस शेख ने कहा है कि दो दिन बाद वह सभी आरोपों के जवाब देंगे। एआईएमआईएम पार्षद सहर शेख के पिता ने शुक्रवार को इसके लिए उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को दोषी ठहराया और कहा कि वह अपना पक्ष साबित करने के लिए प्रामाणिक दस्तावेज पेश करेंगे। तहसीलदार उमेश पाटिल ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश एनसीपी की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद की शिकायत की जांच के बाद दिया था।


पिता यूनुस शेख ने दो दिन का मांगा समय


पत्रकारों से बात करते हुए यूनुस शेख ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र विवाद एआईएमआईएम पार्षद के विरोधियों द्वारा रचा गया था क्योंकि वे उनकी बेटी की राजनीतिक प्रगति को पचा नहीं पा रहे थे और इसलिए ऐसे उपायों का सहारा ले रहे थे। उन्होंने कहा कि वे प्रामाणिक दस्तावेजों के साथ इस मुद्दे पर अपने रुख को साबित करेंगे। यूनुस शेख ने कहा कि दो दिन इंतजार कीजिए और मैं सभी आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दूंगा। उन्होंने कहा कि तहसीलदार ने केवल रिपोर्ट दी है, प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया है। इस बीच, सहर शेख ने बृहस्पतिवार रात को सोशल मीडिया पर एक संदेश “गेम ओवर” पोस्ट किया, जब वह दक्षिण मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आईपीएल मैच देखते नजर आयी थीं।

तहसीलदार की जांच में क्या निकला?


उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) को 25 मार्च को सौंपी गई तहसीलदार की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि यूनुस शेख ने प्रथम दृष्टया राज्य चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया था। इसमें कहा गया है कि उनका 2011 का ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था, उसमें एसडीओ के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे, और उसके शीर्षक से महाराष्ट्र राज्य शब्द गायब था। अधिकारियों को पता चला कि शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे। महाराष्ट्र जाति प्रमाण पत्र अधिनियम, 2000 के तहत, प्रवासियों को फॉर्म-10 प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है।

फॉर्म-8 के जरिए हेराफेरी का आरोप


आरोप है कि शेख ने फॉर्म-8 के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया, जो कि स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने 2018 में उनके स्वयं के प्रथम दृष्टया फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग करके सहर शेख के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। परिवार हालांकि ठाणे में रहता था, लेकिन सहर शेख का प्रमाण पत्र मुंबई शहर के कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त किया गया था। तहसीलदार ने सभी ऐसे प्रमाणपत्रों को तत्काल रद्द करने और यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की।

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