गन्ना उत्पादन में गिरावट से किसानों को 3200 करोड़ का नुकसान, भाकियू अराजनैतिक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते गन्ना उत्पादन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया कि पिछले तीन पेराई सत्रों से उत्पादन में गिरावट जारी है, जिसके चलते वर्तमान सत्र में किसानों को करीब 3200 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मलिक ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस और वैज्ञानिक निर्णय नहीं लिए गए, तो आने वाला सत्र किसानों के लिए और अधिक नुकसानदायक साबित हो सकता है।

पत्र में कहा गया कि गन्ना उत्तर प्रदेश में केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश में लगभग 45 लाख गन्ना किसान, 122 चीनी मिलें और करीब 50 लाख किसान-मजदूर परिवार इस पर निर्भर हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 2017-18 में पेराई 1111 लाख टन से अधिक थी, जो घटकर 2025-26 में 875.06 लाख टन रह गई है। इस गिरावट का सबसे अधिक असर सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल में देखने को मिल रहा है। मुजफ्फरनगर में 800 करोड़ और बिजनौर में 520 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।

धर्मेंद्र मलिक ने उत्पादन घटने के कई कारण भी गिनाए हैं, जिनमें एक ही प्रजाति Co-0238 पर अत्यधिक निर्भरता, टॉप बोरर, पायरीला, सफेद मक्खी और दीमक जैसे कीटों का प्रकोप, महंगे लेकिन अप्रभावी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग, बाजार में अमानक दवाओं की बिक्री और विभागों के बीच समन्वय की कमी शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुगर मिलें किसानों की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हुए बीज और कीटनाशकों के व्यापार में भी शामिल हो रही हैं।

पत्र में गन्ना क्षेत्र को “संक्रमण काल” से गुजरता हुआ बताते हुए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें क्षेत्र-विशेष कीट एवं रोग प्रबंधन नीति लागू करना, उच्च स्तरीय समिति का गठन, नई रोग-प्रतिरोधी प्रजातियों का विकास, कीटनाशकों की गुणवत्ता पर नियंत्रण, और किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन का प्रशिक्षण देना शामिल है। साथ ही कृषि विभाग, गन्ना विभाग और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी मांग की गई है।भाकियू अराजनैतिक ने सरकार से अपील की है कि इस गंभीर संकट पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि गन्ना किसानों को राहत मिल सके और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।

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