किसानों ने ट्रैक्टर पर यूरो-5 जैसे मानक लागू करने पर जताई आपत्ति कहा, छोटे किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

मुजफ्फरनगर भारत सरकार द्वारा कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में ट्रैक्टर पर यूरो-5 (TREM-IV और TREM-V) मानक लागू करने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों, उद्योग जगत और मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसान के ट्रैक्टर की तुलना व्यावसायिक वाहनों से नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पहले ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण का वैज्ञानिक आंकलन किया जाए, उसके बाद ही मंत्रालय अपनी राय देगा।भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने किसानों की ओर से विस्तृत सुझाव कृषि मंत्री को सौंपे। यूनियन ने कहा कि किसान देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान के समर्थक हैं, लेकिन नीति बनाते समय खेतीकिसानी की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझना आवश्यक है।मलिक ने कहा कि नए उत्सर्जन नियमों के लागू होने से छोटे किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। नई तकनीक वाले ट्रैक्टर की कीमत ₹2 से ₹3 लाख तक बढ़ जाएगी, जिससे किसान पर कर्ज का दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा किइस नीति का सीधा लाभ केवल उद्योग को होगा, जबकि किसान की जेब पर इसका असर सबसे अधिक पड़ेगा।उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में EFI और DPF जैसी तकनीक वाले ट्रैक्टरों की मरम्मत के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित तकनीशियन मौजूद नहीं हैं। इससे किसानों को कंपनियों की सर्विस पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे मेंटेनेंस खर्च भी बढ़ेगा। वहीं पुराने ट्रैक्टरों पर रोक लगने से ग्रामीण मैकेनिकों की जीविका पर भी संकट जाएगा।यूनियन ने सुझाव दिया कि 70 HP से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों पर ही सख्त उत्सर्जन नियम लागू किए जाएं, क्योंकि उनका उपयोग अधिकतर व्यावसायिक या औद्योगिक कार्यों में होता है। 70 HP से नीचे के ट्रैक्टरों को इन नियमों से बाहर रखा जाए, ताकि छोटे किसान प्रभावित हों।संगठन ने यह भी कहा कि ट्रैक्टर से होने वाला प्रदूषण वास्तविकता में बहुत कम है। एक औसत किसान अपने ट्रैक्टर को साल भर में केवल 200–250 घंटे ही चलाता है, यानी प्रतिदिन लगभग 25 मिनट। ऐसे में ट्रैक्टर से होने वाला प्रदूषण, शहरी गैस चूल्हों या जेनरेटरों की तुलना में बहुत कम है।भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने मांग की कि TREM-IV और TREM-V मानकों को चरणबद्ध रूप में लागू किया जाए ताकि किसानों पर अचानक कोई अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़े। संगठन ने यह भी कहा कि ट्रैक्टर की लाइफ लिमिट तय की जाए, बल्कि प्रदूषण की जांच इंजन की कंडीशन और पावर आउटपुट के आधार पर की जाए।अंत में यूनियन ने दोहराया कि किसान देश के विकास के सहभागी हैं, परंतु नीतियों को लागू करने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति और ग्रामीण हकीकत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts