पेपर उद्योग पर जीएसटी दरों में असमानता से बढ़ी चिंता, उद्यमी बोले– व्यवसाय करना होगा मुश्किल

मुजफ्फरनगर। हाल ही में सम्पन्न हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए फैसले से पेपर और कोरुगेटेड बॉक्स उद्योग से जुड़े उद्यमियों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। काउंसिल ने जहां कोरुगेटेड बॉक्स पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है, वहीं इसके मुख्य कच्चे माल पेपर पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। उद्योग जगत का कहना है कि यह निर्णय कर संरचना में गंभीर असमानता पैदा कर देगा और व्यवसाय करना मुश्किल हो जाएगा।उद्यमियों का कहना है कि किसी भी उद्योग की आर्थिक संरचना तभी संतुलित रह सकती है जब कच्चे माल और तैयार उत्पाद पर टैक्स दरों में संतुलन हो। वर्तमान स्थिति में जब कच्चे माल पर 18 प्रतिशत और तैयार उत्पाद पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, तो स्वाभाविक है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का बड़ा हिस्सा बेवजह फंस जाएगा। इससे केवल पूंजी का प्रवाह प्रभावित होगा, बल्कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बढ़ जाएगा। उद्योग संचालकों ने आशंका जताई है कि यदि कर ढांचे में जल्द सुधार नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में छोटी इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान निर्णय से उद्योगों को कच्चा माल खरीदने पर अधिक कर देना पड़ेगा, जबकि तैयार उत्पाद बेचने पर कम कर लगेगा। इस असंतुलन से उद्यमियों को रिफंड के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ेगा और पूंजी फंसने के कारण उत्पादन क्षमता घट जाएगी। उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि इससे केवल व्यवसायियों का उत्साह टूटेगा, बल्कि रोज़गार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।उद्योग जगत ने सरकार से मांग की है कि पेपर पर भी जीएसटी दर 5 प्रतिशत तय की जाए ताकि तैयार उत्पाद और कच्चे माल की कर संरचना में संतुलन स्थापित हो सके। उद्यमियों का कहना है कि संतुलित कर व्यवस्था से केवल उद्योगों का संचालन सुचारू रूप से चल सकेगा, बल्कि सरकार को भी दीर्घकालिक राजस्व लाभ मिलेगा। व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से सकारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा जताई है, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिल सके और देश की आर्थिक वृद्धि में उनका योगदान लगातार बना रहे।

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