मुज़फ्फरनगर। जमीयत उलेमा ज़िला मुज़फ्फरनगर के तत्वावधान में जमीयत सद्भावना मंच के बैनर तले आयोजित सद्भावना सम्मेलन में विभिन्न धर्मों, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक, अधिवक्ता और किसान संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने देश में सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। सम्मेलन में बढ़ती सांप्रदायिकता, नफ़रत फैलाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर समाज में विभाजन पैदा करने वाली प्रवृत्तियों की कड़ी निंदा करते हुए शांति और संविधान की रक्षा का संदेश दिया गया। सम्मेलन के संयोजक कारी ज़ाकिर हुसैन क़ासमी ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश की शांति, सुरक्षा, विकास, भारतीय संविधान और अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए जमीयत उलेमा–ए–हिंद की विचारधारा को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने उलेमा, इमामों और युवाओं से संगठन के मिशन को अपनाने तथा नफ़रत की राजनीति से दूर रहकर सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने की अपील की। ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट प्रमोद त्यागी ने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, मौलाना हुसैन अहमद मदनी और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे नेताओं के विचार देश को मजबूती प्रदान करते हैं तथा जमीयत उलेमा–ए–हिंद ने हमेशा लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता का समर्थन किया है। महंत प्रवींदर धारिया ने संगठन की सेवाओं की सराहना करते हुए इसे अमन और भाईचारे का प्रतीक बताया।
किसान नेता कमल मित्तल ने युवाओं को नशे और अपराध से दूर रखकर समाज निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जबकि मास्टर विजय सिंह ने कहा कि इस्लाम इंसानियत, न्याय और सहानुभूति की शिक्षा देता है। सम्मेलन के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने समाज में शांति, प्रेम, धार्मिक सद्भाव और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने तथा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से नफ़रत फैलाने वाली ताकतों का मुकाबला करने का सामूहिक संकल्प लिया। इस दौरान विभिन्न धर्मों और सामाजिक संगठनों के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।























































