मुजफ्फरनगर में कृषि यंत्रों पर अनुदान हेतु ई-लाटरी प्रक्रिया 11 नवंबर को होगी आयोजित

मुजफ्फरनगर। जिले के उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार सिरोही ने समस्त कृषक भाइयों को सूचित किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए जिन किसानों ने ऑनलाइन बुकिंग की है, उनके लिए ई-लाटरी प्रक्रिया का आयोजन 11 नवंबर 2025 को अपराह्न 12 बजे से किया जाएगा। यह कार्यक्रम विकास भवन स्थित सभागार में आयोजित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत “प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फार इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू” योजना एवं “सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन” योजनान्तर्गत बुक किए गए कृषि यंत्रों के चयन किए जाएंगे।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस ई-लाटरी प्रक्रिया में उन्हीं किसानों को प्रतिभाग करना होगा जिन्होंने ऑनलाइन बुकिंग के समय अपने मोबाइल नंबर से टोकन प्राप्त किया था। किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे उसी पंजीकृत मोबाइल नंबर सहित कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

कार्यक्रम में जिन कृषि यंत्रों का चयन किया जाएगा, उनमें रोटावेटर, हैरो, टिलर, लेजर लैंड लेवलर, कल्टीवेटर, पावर टिलर, सुपर सीडर, एम.बी. प्लाऊ, रीपर कम्बाइंडर, कम्बाइन हार्वेस्टर विद सुपर एसएमएस, फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण शामिल हैं। इन यंत्रों का उद्देश्य किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक से जोड़ना और फसलों के अवशेष प्रबंधन को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

कृषि विभाग का यह प्रयास कृषि कार्यों में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की उत्पादकता में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार किसानों को नवीनतम कृषि उपकरणों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि कार्यों को सरल और समयबद्ध बनाने का प्रयास कर रही है।

जिले के किसानों में इस ई-लाटरी प्रक्रिया को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई किसान उम्मीद जता रहे हैं कि उन्हें आधुनिक उपकरणों का लाभ मिलेगा, जिससे वे अपनी खेती को अधिक कुशल और लाभदायक बना सकेंगे। कृषि विभाग ने सभी पात्र किसानों से समय पर कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की है ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

इस पहल से न केवल कृषि कार्यों में सुधार होगा बल्कि खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। आधुनिक मशीनों की मदद से किसान फसल अवशेषों का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से कर सकेंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

इस प्रकार, कृषि विभाग का यह आयोजन जिले के किसानों के लिए तकनीकी सशक्तिकरण का अवसर लेकर आया है, जो आधुनिक कृषि युग की दिशा में एक और सकारात्मक कदम साबित होगा।

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