भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने प्रदेशभर में मंडियों के बाहर व्यापारियों और चावल मिलों द्वारा की जा रही धान की अवैध खरीद पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में व्यापारी और चावल मिलें किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम दरों पर खरीद रहे हैं। किसानों का धान 1500 से 1600 रुपये प्रति कुंतल में खरीदा जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य इससे कहीं अधिक है। यह किसानों के साथ खुला अन्याय है।
मलिक ने कहा कि किसानों ने इस वर्ष जून से सितंबर तक कीटों, बीमारियों और प्रतिकूल मौसम जैसी तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी फसल तैयार की है। लेकिन जब बिक्री का समय आया, तो उन्हें समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा। मंडियों में धान क्रय केंद्रों पर नमी, बारदाना और परिवहन जैसे बहाने बनाकर किसानों को लंबी कतारों में खड़ा किया जा रहा है। ऐसे में खराब मौसम के डर से किसान मजबूर होकर अपनी उपज औने-पौने दामों में बाहर के व्यापारियों को बेचने पर विवश हैं।
भाकियू अराजनैतिक के प्रवक्ता ने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद बेहद धीमी गति से हो रही है। जबकि हरियाणा और पंजाब में 80 प्रतिशत से अधिक धान सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा जा चुका है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम है। यह सरकार की खरीद व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की फसल का क्रय पूरी पारदर्शिता के साथ समर्थन मूल्य पर किया जाए ताकि किसान शोषण से बच सकें।
पत्र में धर्मेन्द्र मलिक ने मंडी अधिनियम का हवाला देते हुए कहा है कि अधिनियम की धारा 7(2)(ख) के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी मंडी क्षेत्र में कृषि उत्पाद का थोक व्यापार केवल निर्दिष्ट मंडी स्थल या उपमंडी स्थल पर ही किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों — जैसे रामपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर और बाराबंकी — में मंडी परिसर के बाहर चावल मिलों और व्यापारियों द्वारा अवैध खरीद की जा रही है। इससे किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य नहीं मिल पा रहा है और मंडी अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है।
मलिक ने मांग की कि सरकार तत्काल ऐसी अवैध खरीद पर रोक लगाए और अब तक जितनी भी खरीद बिना मंडी प्रवेश पर्ची के हुई है, उसका पूरा विवरण एकत्र कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि जब मंडियों और उपमंडियों का निर्माण किसानों को शोषण से बचाने और उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से किया गया है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्रय प्रक्रिया केवल इन्हीं स्थानों पर संचालित हो।
भाकियू अराजनैतिक ने सरकार से आग्रह किया है कि किसानों के हित में तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की जाए, जिससे उन्हें उनके धान का पूरा समर्थन मूल्य मिल सके और फसल बेचने के लिए किसी भी प्रकार की मजबूरी का सामना न करना पड़े।















