मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) नेता सीताराम येचुरी का गुरुवार को निधन हो गया. वो एक्यूट रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से पीड़ित थे. 19 अगस्त को उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था. तब से यहां उनका इलाज चल रहा था. बीते दिन तबीयत बिगड़ने पर 72 साल के येचुरी को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया था.सीताराम येचुरी का जन्म 1952 में मद्रास (चेन्नई) में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता सर्वेश्वर सोमयाजुला येचुरी आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में इंजीनियर थे. मां कल्पकम येचुरी सरकारी अधिकारी थीं. उन्होंने सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली से अर्थशास्त्र में बीए और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की. 1975 में सीताराम येचुरी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने थे.साल 1975 में जब येचुरी JNU में पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान इमरजेंसी के समय उन्हें गिरफ्तार किया गया था. कॉलेज के समय से ही वो राजनीति में आ गए. वो तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए. येचुरी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आवास के बाहर पर्चा पढ़ने के चलते सुर्खियों में आए थे.
सीताराम येचुरी को पूर्व महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की गठबंधन-निर्माण विरासत को जारी रखने के लिए जाना जाता है. साल 1996 में उन्होंने संयुक्त मोर्चा सरकार के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का मसौदा तैयार करने के लिए पी. चिदंबरम का सहयोग किया था. साल 2004 में यूपीए सरकार के गठन के दौरान गठबंधन भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.
राहुल गांधी ने जताया शोक
सीताराम येचुरी के निधन पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शोक जताया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए पोस्ट में राहुल ने लिखा,सीताराम येचुरी जी मेरे मित्र थे. वो देश के विचारों के रक्षकऔर देश की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति थे. हम लोग लंबी चर्चा किया करते थे. दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदना.















