मुजफ्फरनगर शहर में हाल ही में बनी सड़कों को तोड़कर गैस पाइप लाइन बिछाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर की अंबाविहार कॉलोनी में आईजीएल कंपनी द्वारा कराए जा रहे कार्य को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। भाकियू उत्तर प्रदेश के एनसीआर महासचिव एवं सभासद पति शाहिद आलम ने आरोप लगाया है कि कंपनी का ठेकेदार बिना नगरपालिका की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए ही सड़कों की खुदाई कर रहा है। उनका कहना है कि नई बनी सड़कों को जगह-जगह से तोड़ दिया गया है, जिससे कॉलोनी की स्थिति बदहाल हो गई है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शाहिद आलम ने बताया कि नगरपालिका परिषद द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि गैस पाइप लाइन बिछाने से पहले कंपनी को बैंक गारंटी जमा करनी होगी, ताकि बाद में सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही प्रशासनिक शुल्क जमा करने की भी शर्त रखी गई थी। इस संबंध में नगरपालिका की ओर से एक औपचारिक पत्र भी जारी किया गया था, जिसमें सभी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लेख था। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा इन नियमों की अनदेखी करते हुए बिना बैंक गारंटी जमा किए ही सड़कों को खोदा जा रहा है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी पहले भी कई स्थानों पर पाइप लाइन डालने के बाद सड़कों की मरम्मत ठीक से नहीं करा पाई है, जिससे शहर की सड़कों की हालत पहले से ही खराब हो चुकी है। अब अंबाविहार कॉलोनी में भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। शाहिद आलम के अनुसार, केवल इसी क्षेत्र में करीब 20 लाख रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि नई बनी सड़कों को फिर से तोड़ दिया गया है और उनकी मरम्मत को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
वहीं, स्थानीय निवासियों ने भी इस कार्य के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कॉलोनी की सड़कों का निर्माण हाल ही में कराया गया था, लेकिन अब गैस पाइप लाइन बिछाने के नाम पर उन्हें फिर से खराब कर दिया गया है। इससे न केवल रोजमर्रा के आवागमन में दिक्कतें बढ़ गई हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है।शाहिद आलम ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि जब तक कंपनी सभी नियमों का पालन करते हुए बैंक गारंटी जमा नहीं करती और सड़कों की मरम्मत की ठोस व्यवस्था नहीं करती, तब तक इस तरह की खुदाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। अब देखना यह होगा कि नगरपालिका प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह विवाद और भी गहरा सकता है।















