कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रूस के साथ भारत के तेल समझौतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि क्या ट्रंप भारत का बाप है? मसूद ने प्रधानमंत्री मोदी से यह स्पष्ट करने की मांग की कि रूस भारत का पुराना मित्र है और इस विवाद में भारत उसके साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी दबाव में भारत के निर्णय प्रभावित नहीं होने चाहिए और देशहित के मामलों में भारत को अपनी नीति स्वतंत्र रूप से अपनानी चाहिए।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश ने केंद्र की नीति पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यह सरकार ‘यहां से तारीफ और वहां से टैरिफ’ की नीति अपनाती दिख रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार की इस रवैये से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है। जयराम रमेश ने कहा कि रणनीतिक और आर्थिक मामलों में स्पष्ट और मजबूत रुख दिखाना किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण है, और भारत को ऐसे मामलों में मित्र राष्ट्रों के साथ अपने संबंधों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि विपक्ष सरकार की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्पष्टता पर सवाल उठा रहा है। मसूद और रमेश की टिप्पणियों से यह भी जाहिर होता है कि कांग्रेस का मानना है कि देश के पुराने मित्रों के साथ रणनीतिक संबंधों में किसी भी तरह की अस्पष्टता या डगमगाहट नुकसानदेह हो सकती है।
कांग्रेस का यह रुख ऐसे समय में आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार को लेकर तनाव बढ़ रहा है। सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपने हितों के आधार पर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए, न कि बाहरी दबावों में फंसकर निर्णय लेना चाहिए। इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि विपक्ष देश की विदेश नीति में स्पष्टता और स्थिरता की मांग कर रहा है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस सांसदों ने केंद्र सरकार से रूस के साथ संबंधों पर स्पष्ट रुख अपनाने और देश के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की है।















