मुजफ्फरनगर। “ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग: मेकिंग द इकोनॉमिक केस फॉर ट्रांसफॉर्मेशन इन इंडिया” शीर्षक के अंतर्गत संचालित टीईईबी एग्रीफूड परियोजना के तहत संतुलित उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR), मोदीपुरम, मेरठ द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) चित्तौड़ा के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जनपद के जानसठ ब्लॉक के कंबेडा और अरोड़ा गांवों के लगभग 60 किसानों ने भागीदारी की। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना और पायलट अध्ययन के लिए उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को परियोजना की रूपरेखा और उसके दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि असंतुलित उर्वरक प्रयोग से जहां मृदा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, उत्पादन लागत में कमी और फसल उत्पादकता में वृद्धि संभव है। किसानों को यह भी समझाया गया कि उर्वरकों का सही मात्रा और समय पर प्रयोग खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक डॉ. प्रमोद सिरोही ने किसानों को परियोजना में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर ही खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। वहीं, सीएसआरएम के प्रमुख डॉ. राघवेंद्र सिंह और परियोजना के प्रमुख अन्वेषक तथा IIFSR के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मेराज आलम अंसारी ने भी किसानों को संबोधित किया और उन्हें नई तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. अंसारी ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक खेती, जैविक खेती और एग्रोफॉरेस्ट्री प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए लगभग 300 किसानों को परियोजना से जोड़ा जाएगा और उनसे संबंधित विभिन्न प्रकार के डेटा एकत्र किए जाएंगे। अध्ययन के दौरान प्राकृतिक, उत्पादित, सामाजिक और मानव पूंजी के आधार पर मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता, मानव कल्याण और सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण किया जाएगा। इस पहल से न केवल खेती के आर्थिक पहलुओं को मजबूत किया जाएगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण जीवन स्तर में भी सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।















