मुजफ्फरनगर। शारदेन स्कूल के प्रांगण में हरियाली तीज का पर्व उल्लास और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों ने पारंपरिक रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर भगवान शिव और देवी पार्वती की झलकियां प्रस्तुत कीं। छात्रों ने भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक गीतों पर मनमोहक नृत्य किया और विद्यालय परिसर में सजे झूलों पर झूलकर त्योहार का आनंद उठाया।
कार्यक्रम में कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों ने विशेष योगदान दिया। उन्होंने रंगारंग प्रस्तुति के साथ हरियाली तीज पर आधारित कविताएं सुनाईं और भाषणों के माध्यम से त्योहार के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बताया। तीज का पर्व विशेष रूप से महिलाओं और कन्याओं के लिए अत्यंत महत्व रखता है। यह व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
हरियाली तीज को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व पर विवाहित महिलाएं हरे रंग के परिधान धारण करती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं और संपूर्ण सोलह श्रृंगार करके शिव-पार्वती की आराधना करती हैं। इस दिन सास द्वारा नई बहू को वस्त्र, हरी चूड़ियां, मिठाइयां और श्रृंगार सामग्री भेंट स्वरूप दी जाती हैं, ताकि उसका सुहाग अखंड बना रहे और वंश वृद्धि हो।
त्योहार की विशेषता यह भी रही कि पेड़ों पर पारंपरिक झूले लगाए गए, जिन पर छात्राएं व महिलाएं झूलती रहीं। पूरे माहौल में सावन की हरियाली और भक्ति संगीत की गूंज सुनाई दी। इस अवसर पर आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता में बालिकाओं ने भाग लेकर अपने हाथों पर सुंदर-सुंदर डिजाइन की मेंहदी रचाई और पारंपरिक परंपराओं के साथ इस त्योहार को जीवंत किया।
विद्यालय प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा की और इस पर्व को भारतीय संस्कृति की गरिमा का प्रतीक बताया।















