भारत के शैक्षिक इतिहास में पहली बार किसी संस्कृत विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा साइंस में एक विशेष बीटेक (B.Tech) कार्यक्रम की शुरुआत की है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (28 जून 2026) को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें एपिसोड में इस पहल की विशेष रूप से सराहना की. उन्होंने कहा कि यह युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखते हुए आधुनिक तकनीक के लिए तैयार करने का एक ऐतिहासिक प्रयास है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मिली मंजूरी
यह नया बीटेक कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य संस्कृत संस्थानों को बहु-विषयक (multi-disciplinary) शिक्षण केंद्रों में बदलना है. इस पाठ्यक्रम को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है. विश्वविद्यालय के नासिक परिसर में संचालित होने वाले इस चार वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए कुल 66 सीटें स्वीकृत की गई हैं, जिनमें 60 नियमित सीटें और 6 सुपरन्यूमरेरी (अतिरिक्त) सीटें शामिल हैं.
भारतीय भाषाओं के लिए तैयार होंगे एआई टूल्स
इस कार्यक्रम का मुख्य ध्यान आधुनिक तकनीकी कौशल सिखाने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) को मजबूत करना है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “यह कदम भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है. इससे भारतीय भाषाओं के लिए नए एआई उपकरण विकसित करने और हमारे प्राचीन ग्रंथों व पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण को गति मिलेगी.”इसके माध्यम से छात्रों को आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, न्याय और अन्य शास्त्रीय विधाओं जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में आधुनिक कम्प्यूटेशनल तकनीकों को लागू करने का अवसर मिलेगा.
पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीक और भाषा विज्ञान का संगम
शिक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, यह कार्यक्रम मुख्यधारा की इंजीनियरिंग शिक्षा को भारत की भाषाई और ज्ञान परंपराओं के साथ जोड़ता है. इससे संस्कृत और पारंपरिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए आधुनिक तकनीकी शिक्षा में करियर बनाने के नए रास्ते खुलेंगे.
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- तकनीकी घटक: इसके तहत छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, पायथन प्रोग्रामिंग, स्टैटिस्टिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और डीप लर्निंग की पढ़ाई कराई जाएगी.
- भाषाई और ज्ञान प्रणाली घटक: इसमें नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, मशीन ट्रांसलेशन, स्पीच रिकग्निशन, कन्वर्सेशनल एआई, लैंग्वेज टेक्नोलॉजीज, नॉलेज रिप्रेजेंटेशन और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक शामिल हैं.
इस कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तय की गई है. इसमें कक्षा 12वीं (भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित) पास करने वाले वे छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्हें संस्कृत की बुनियादी समझ है.















