कनाडा सरकार ने 2026 से 2028 तक के लिए अपने नए इमिग्रेशन लेवल्स प्लान की घोषणा कर दी है, जिसे अब तक का सबसे सख्त कदम माना जा रहा है। नए प्लान के तहत देश स्थायी निवासियों (Permanent Residents) की संख्या को स्थिर रखते हुए हर साल करीब 3.80 लाख नए स्थायी निवासियों को स्वीकार करेगा। हालांकि, सरकार ने अस्थायी निवासियों की हिस्सेदारी को जनसंख्या के 5% से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में विदेशी छात्रों और अस्थायी वर्क परमिट धारकों के लिए कनाडा में प्रवेश पाना पहले से कहीं अधिक मुश्किल हो जाएगा।
सरकार का तर्क है कि बढ़ती अस्थायी आबादी देश की आवास, रोजगार और सामाजिक सेवाओं पर दबाव बढ़ा रही है, इसलिए उसे संतुलित करना आवश्यक है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत समेत उन देशों पर पड़ेगा, जहां से हर साल हजारों छात्र उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए कनाडा जाते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम कनाडा की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
विदेशी छात्रों पर सबसे बड़ी चोट
कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीज़ा सीमाएं लगभग आधी कर दी हैं. 2026 में सिर्फ 1.55 लाख, और 20272028 में 1.50 लाख छात्रों को ही पढ़ाई की अनुमति मिलेगी. पिछले साल की तुलना में यह करीब 50% की कमी है. कनाडा में 2023 के अंत तक विदेशी छात्रों की संख्या 10 लाख तक पहुंच चुकी थी. इसके बाद जनवरी 2024 में सरकार ने स्टडी परमिट पर कैप लगा दिया था, जिसके चलते 2024 में केवल 2.6 लाख नए परमिट मिलने की उम्मीद थी.विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कनाडा के शिक्षा क्षेत्र के लिए झटका साबित होगा. कॉलेजों को अब कम ऑफर लेटर भेजने होंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आएगी और विश्वविद्यालयों की डायवर्सिटी (विविधता) पर भी असर पड़ेगा.
भारत पर सबसे ज्यादा असर
भारत कनाडा को सबसे ज्यादा छात्र भेजने वाले देशों में से एक है. लेकिन अब भारतीय छात्रों के लिए हालात मुश्किल होने वाले हैं. पहले से ही लगभग 50% भारतीय छात्र वीजा आवेदन खारिज हो रहे थे, और अब यह दर 80% तक पहुंच सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि अगस्त 2025 में 74% भारतीय छात्र वीजा आवेदन खारिज कर दिए गए, जो पिछले साल से दोगुना है. सरकार का दावा है कि उन्हें फर्जी एडमिशन लेटर और धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों के हजारों मामले मिले हैं, खासकर भारत और बांग्लादेश से. इसी वजह से अब वित्तीय दस्तावेज और कॉलेज सत्यापन की प्रक्रिया को और कड़ा किया गया है.
कामगारों के लिए भी नए नियम
सिर्फ छात्र ही नहीं, अस्थायी कामगारों (Temporary Foreign Workers) के लिए भी नियम सख्त हो गए हैं. 2026 में केवल 2.30 लाख कामगारों को अनुमति मिलेगी, जबकि अगले दो सालों के लिए यह संख्या 2.20 लाख रखी गई है. हालांकि, सरकार ने 33,000 कामगारों के लिए स्थायी निवास का नया रास्ता खोलने का वादा किया है, खासतौर पर हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन और फ्रेंच भाषी क्षेत्रों में.















