दिल्ली पुलिस मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को निकाले जाने वाले ताजिया जुलूस को लेकर खास तैयारी की है। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन के जरिए निगरानी की जाएगी।संदिग्ध तत्वों की पहचान के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली में जुलूस के दौरान दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा।
दिल्ली में ताजिया जुलूस को लेकर तैयारी
राष्ट्रीय राजधानी में कई इलाकों में ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं, लेकिन बड़े जुलूस मुख्य रूप से उत्तर पूर्वी दिल्ली और पुरानी दिल्ली में निकाले जाते हैं। इसके मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंजताम किए हैं। पुलिस ने इलाके के प्रतिष्ठित लोगों और अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें भी की हैं ताकि जुलूस के दौरान कोई व्यवधान पैदा ना हो।
पुलिस ने बताया पूरा प्लान
उत्तर पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राहुल अलवल ने बताया कि इलाके में ‘आशूरा’ के जुलूस को लेकर 1100 स्थानीय पुलिस कर्मियों को तैनात करने की योजना है और पुलिस मुख्यालय से सुरक्षा बलों की 20 कंपनियों की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भीड़ पर नजर रखने के लिए 14 ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा और आपराधिक तत्वों पर नजर रखने के लिए चेहरा पहचानने वाली तकनीक भी इस्तेमाल की जाएगी।
भीड़भाड़ वाले इलाके में खास निगरानी
वहीं, उत्तर दिल्ली के डीसीपी राजा बंठिया ने बताया कि संवेदनशील और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पर्याप्त संख्या में ड्रोन और फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर तैनात किए जाएंगे। उन्होंने भी कहा कि जिले में चेहरा पहचानने वाली तकनीक भी इस्तेमाल की जाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तर दिल्ली में पांच सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) 37 निरीक्षक और 924 अन्य पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा।
ड्रोन के साथ पुलिसकर्मियों की भी तैनाती
बंठिया के मुताबिक, इसी के साथ दिल्ली पुलिस की अन्य यूनिट्स से दो कंपनियां और बल के बाहर से सुरक्षा कर्मियों की एक कंपनी को भी तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि थाना और जिला स्तर पर अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें आयोजित की गई हैं और उनसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि जुलूस शांतिपूर्ण हों।
दंगा नियंत्रण उपकरणों से लैस फोर्स की तैनाती
बंठिया ने कहा कि सभी थानों में पर्याप्त संख्या में रिजर्व कर्मियों को तैनात रखा जाएगा। डीसीपी अलवल के मुताबिक, संवेदनशील इलाकों में बैरिकेंडिग की जाएगी और त्वरित कार्रवाई टीम (क्यूटीआर) और दंगा नियंत्रण उपकरणों से लैस अतिरिक्त बल तैनात होंगे। साथ में स्वयंसेवक तैनात होंगे। अलवल ने कहा कि जुलूस को सुचारू रूप से निकालने को लेकर अमन कमेटियों, भाइचारा समितियों, केबल ऑपरेटरों और इलाके के प्रतिष्ठित लोगों के साथ थानेदार स्तर से लेकर डीसीपी स्तर तक 21 बैठकें की गई हैं।
पुलिस के साथ ताजिया जुलूस आयोजन करने वाले संगठन की बैठक
ताजिया जुलूस आयोजित करने वाले संगठन ‘अंजुमन ताजियादरान’ के मुख्य संरक्षक परवेज नूर ने बताया कि मध्य दिल्ली में पुलिस के साथ बैठकें हुई हैं और हमारे स्वयंसेवक हर ताजिए के साथ होते हैं। उन्होंने कहा कि एक ताजिए के साथ 10 स्वयंसेवक होते हैं और तकरीबन 50-60 ताजिए होते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार ‘आशूरा’ शुक्रवार को पड़ रहा है जिस वजह से जुलूस जुमे की नमाज के बाद दोपहर तीन बजे निकालेंगे।
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद जुलूस
नूर ने जुलूस के बारे में बताया कि एक तरफ से जामा मस्जिद से निकलने वाला जुलूस अजमेरी गेट आएगा और दूसरी तरफ पुल बंगश के पास बेरी वाले बाग से शुरू होने वाला जुलूस कुतुब रोड होते हुए पहाड़गंज आएगा और वहां से दोनों जुलूस इकट्ठा होकर जोर बाग स्थित स्थानीय करबला जाएंगे। पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जुलूस के दौरान कानून बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील इलाकों में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जानिए क्यों निकाला जाता है ताजिया जुलूस
इसके अलावा, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर पश्चिम दिल्ली में भी पुलिस ने ताजिया जुलूस को लेकर अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें की हैं। इस्लामी केलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के 10वें दिन ‘आशूरा’ पर देश के अलग अलग हिस्सों में इमाम हुसैन की याद में जुलूस निकाला जाता है। 680वीं ई. में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके करीबी साथियों को इराक के करबला में इसी तारीख को शहीद कर दिया गया था। इस साल शुक्रवार को ‘आशूरा’ है।























































