मुजफ्फरनगर के कलेक्टरेट कंपाउंड में Hub for Empowerment of Women के कार्मिकों द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण तथा समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के दौरान “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत आकर्षक कैलेंडर वितरित किए गए, जिनमें इस योजना से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। उपस्थित लाभार्थियों एवं आम नागरिकों को विस्तार से बताया गया कि यह अभियान किस प्रकार समाज में बेटियों के जन्म और शिक्षा को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।
कार्यक्रम में कार्मिकों ने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटियों को शिक्षा और समान अवसरों से वंचित रखा जाता है। ऐसे में “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” जैसी पहलें महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा के महत्व से जोड़ती हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित होती हैं। कैलेंडर वितरण के माध्यम से संदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया ताकि समाज की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव आ सके।
इसी कार्यक्रम में विधवा पेंशन योजना का भी विशेष रूप से प्रचार-प्रसार किया गया। कार्मिकों ने महिलाओं को योजना के लाभों के बारे में अवगत कराया और उन्हें इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि विधवा पेंशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय विधवा महिलाओं को वित्तीय सहयोग प्रदान करना है, जिससे वे अपने जीवन को सम्मानजनक तरीके से आगे बढ़ा सकें। इस योजना से महिलाओं को न केवल आर्थिक सहारा मिलता है, बल्कि वे समाज में आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर होती हैं।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कार्मिकों की बातों को गंभीरता से सुना और योजनाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। महिलाओं ने यह भी कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि हर वर्ग की महिला सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सके।
इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण के बिना समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान और विधवा पेंशन जैसी योजनाएं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मजबूत आधार हैं। ऐसे प्रयासों से न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समाज भी समावेशी और संतुलित विकास की ओर अग्रसर होगा।















