मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के निर्देशन में डीएवी पीजी कॉलेज के एनएसएस शिविर के अंतर्गत “बाल विवाह मुक्त मुजफ्फरनगर” अभियान के तहत एक व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय कुमार एवं बाल कल्याण समिति सदस्य डॉ राजीव कुमार की प्रमुख भूमिका रही। डॉ राजीव कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला और इसे सामाजिक अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के अवसरों पर भी प्रतिकूल असर डालता है।
उन्होंने जानकारी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि भारत में विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। किसी भी प्रकार की बाल विवाह की सूचना बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, पुलिस आपातकालीन सेवा 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या स्थानीय पुलिस को दी जा सकती है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को कानून की जानकारी देने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर “बाल विवाह एक अभिशाप” विषय पर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें नबिया, राधिका, सालेहा, वंशिका, अंजलि सहित अन्य प्रतिभाशाली प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सफल प्रतिभागियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया और उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य डॉ गरिमा जैन के मार्गदर्शन में प्रो. डॉ रचना त्यागी, प्रो. आसिफ मोहम्मद और प्रो. संजीव कुमार का विशेष सहयोग रहा। जनपद शैक्षिक संग्रहालय में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से बालक और बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, संरक्षण और स्वावलंबन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।















