आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने जा रहा है। टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिन्हें पांच ग्रुप में बांटा गया है। भारतीय टीम ग्रुप ए में शामिल है, जहां उसके साथ पाकिस्तान, अमेरिका, नामीबिया और नीदरलैंड्स जैसी टीमें हैं। लगभग सभी टीमों ने अपने-अपने स्क्वाड का ऐलान कर दिया है, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही इसकी प्लानिंग को लेकर बहस तेज हो गई है।पूर्व भारतीय गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने आईसीसी की मौजूदा योजना पर नाराजगी जाहिर की है। अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ में अश्विन ने कहा कि इस बार का टी20 वर्ल्ड कप दर्शकों को स्टेडियम तक खींचने में नाकाम रह सकता है। उनका मानना है कि भारत-अमेरिका या भारत-नामीबिया जैसे मुकाबले फैंस के लिए उतने आकर्षक नहीं होंगे, जिससे शुरुआती दौर में ही टूर्नामेंट का रोमांच कमजोर पड़ सकता है।
अश्विन ने पुराने वर्ल्ड कप की यादें साझा करते हुए कहा कि 1996, 1999 और 2003 के विश्व कप उनके लिए बेहद खास थे। उस समय वर्ल्ड कप चार साल में एक बार आता था और फैंस शेड्यूल कार्ड तक संभालकर रखते थे। हर मुकाबले को लेकर उत्सुकता रहती थी, लेकिन अब टूर्नामेंट की अधिकता और ग्रुप स्टेज के असंतुलन ने उस रोमांच को कम कर दिया है।उन्होंने यह भी कहा कि अगर शुरुआती दौर में भारत की भिड़ंत इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों से होती, तो टूर्नामेंट का माहौल शुरू से ही बन जाता। मौजूदा फॉर्मेट में सुपर-8 तक पहुंचते-पहुंचते दर्शकों की दिलचस्पी सुस्त पड़ सकती है, जो आईसीसी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
टी20 वर्ल्ड कप के अलावा अश्विन ने वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि 2027 के वनडे वर्ल्ड कप के बाद आईसीसी को इस फॉर्मेट पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। फैंस तेजी से टी20 क्रिकेट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जबकि टेस्ट क्रिकेट को सीमित लेकिन स्थिर दर्शक वर्ग का समर्थन मिल रहा है। असली खतरा वनडे क्रिकेट के अस्तित्व को लेकर है, जिसे बचाने के लिए ठोस रणनीति की जरूरत होगी।कुल मिलाकर अश्विन का बयान आईसीसी की मौजूदा योजना और क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिस पर आने वाले समय में चर्चा और तेज हो सकती है।















